Falling for Her Rise


She likes to rise,
But I like to fall—
Fall into the depths of her lap,
For her bosom, soft as night, cradles me whole.
She rises with strength, defiant and proud,
While I surrender, weightless, to her embrace,
Drawn to the quiet, the calm, the tender unknown.

Where she soars to conquer the skies,
I drift below, into her tides—
Not in defeat, but in reverence,
For the ocean of her being calls me home.
She rises with fire; I fall with grace,
Together, we dance in our perfect space.

For in falling, I do not lose—
I find the diamonds at the meeting of her thighs,
The treasures of love, of touch, of truth.
She rises, and I fall,
Two forces in motion,
Bound to the rhythm of one endless ocean.

RSD

Sailor in the black ocean


I am the sailor in the black ocean,
Unexplored, vast, shrouded in motion.
No map to guide, no stars to steer,
Only whispers of the unknown,
Full of desire, drawing me near.

The secret beneath the rippling water is untold,
Unexplored, for its depth comes cloaked in darkness,
Without a moon to cast its light.
I drift on waves that hum and sigh,
Hinting at treasures buried deep inside.

Without a compass or a guiding light,
The black ocean in the dark of night
Offers everything I may never find.
Its vast silences speak to my soul,
Turning each ride into something whole.

What lies below? Gems of light,
Diamonds that glow in eternal night?
A soul untouched, a mirror of me,
The darker it is, the purer it seems,
Its magnetism guiding my wandering dreams.

The ocean, unadorned, does not attract the world—
It is black, unseen, overlooked.
Yet in its depths,
A glimmer of hope and love binds me.
I got diamonds at the meeting of my thighs,
And I dance.

Its every wave destroys despair,
Every moment shared reveals its beauty.
Each drop of water, a gift to my soul,
Each ripple making me whole.

I am the sailor, the seeker, the dreamer,
The weaver of silence, the bearer of gleam.
The black ocean is no ordinary sea—
I’ll sail till my final breath.
Here, my masculine courage meets
The pure embrace of feminine energy.

Dedicated to Maya Angelou. I took the line “I got diamonds at the meeting of my thighs” from her poem “I rise”.

RSD

गुस्ताखियाँ


संभाल के रख अपनी अदा,
हुनर को
मैं भी जी रहा हूँ, कमा रहा हूँ
सिर्फ करने को इनसे
हर रात गुस्ताखियाँ।

RSD

पहला प्यार बिहार जैसा


पहला प्यार कैसा होता है
बिहार जैसा।
उजाड़ हो गया जहाँ मेरा पर वही मेरा नशा है
कोई और उजाड़े उसे तो फिर दर्द होता है.
जाने कैसे बाँट लेते हैं लोग माकन और देश को
मैं पूर्वांचल का हूँ, पर वो मिथिलांचल मांगते हैं
तो दर्द होता है.
यूँ ही नहीं कहते हमें, बाबूसाहेब छपरा के
हमारे सीने में बिहार बसता हैं.

तेरी चुनर को मैं सजा न सका
ये तेरी विवशता, तेरी गरीबी नहीं है
ये मेरी नाकामी, मेरी वेवफाई हैं.
फटी, मैली -कुचैली कपड़ों में तू
आज भी मीठी सी शहनाई है.
हस ले ये दुनिया चाहे जितना भी
की ढल गयी तेरी जवानी, और
अब झुर्रिया हैं चेहरे पे
पर मैंने जी और देखि तेरी अंगराई है.

तेरी लचकती कमर पे बिहार मेरा
उलझती नज़र पे छपरा बसा
वादियाँ राजगीर की, वो वक्ष तेरे
विचरता है मन, हर प्रातः जहां।

तेरी जुल्फें सघन, उफनती नदी
अधर तेरे, कोई सोइ नागिन
पटना की प्यारी कचौड़ी गली
तेरी वो नाभि गहरी
भटकता है दिल, हर शाम जहां।

तेरी चाल, सोनपुर का वो मेला
जिससे जलता था लाखों का चूल्हा
वो कटाव, वो कसाव तेरा, गंगा का किनारा
लगती थी नाव मेरी, हर रात जहां।

ना मिली नौकरी, तू छोड़ गयी
जैसे पैसे के लिए छूटा गावं मेरा।
तेरी बाहें मेरा खलिहान
अब कोई और सो रहा है जहां।
तेरी यादें, तेरा चेहरा, बनारस
दिल का चैन, लुटा है जहां।

RSD

छपरा लुटाईल बा


इहे कमरिया पे खेत कतना बिकाइल बा
देख ला हाल बाबूसाहेब के, छपरा लुटाईल बा.
जिनगी जवन रहे हरियर, उँहा अब पतझड़ आइल बा.
इहे कमरिया पे खेत कतना बिकाइल बा.

RSD

छलकने से पहले


छलकने से पहले तेरे आँसु खबर हो जाती है मुझे
तुम्हे अब भी यकीन नहीं की किस कदर चाहा है तुझे
तेरी ख़ामोशी को तुझसे पहले समझ लेता हूँ मैं,
तुझसे पहले राह के काँटों पे पाँव रख लेता हूँ मैं.

तेरे इश्क़ का सागर इतना गहरा है मेरे दिल में,
डूबकर हर बार बस नया साहिल मिलता है इसमें.
तू चाहे जितना भी दूर है मुझसे अभी इस पल में,
मैंने दिल की धड़कनों में सदा ही पाया है तुझे.

RSD

बाँटने नहीं देंगे अपना बिहार


वीरों की धरती पे हैं फिर से लड़ाई सांप से
सत्ता हमको बाँट रही है जात -पात के नाम पे.
हम लाये हैं आज़ादी जिसपे हुए लोगों कुर्बान रे
पर रोज-रोज माला डालते बस जवाहर लाल पे.
लड़े वीर कुंवर सिंह, और भगवान् विरसा साथ में
फिर भी दोनों आज अलग-अलग हैं सत्ता के दावं से.
पहले बांटा अपने लालच में हमें बिहार-झारखण्ड में
अब फिर से वो ही लोग मिथिलांचल हैं मांग ते.
मैं तो विरोध करूँगा इसका, दोस्तों तुम भी आवो साथ में
बाँटने नहीं देंगे अपना बिहार, इस बार सत्ता की चाह में.

RSD

रजऊ


कइल कौना नजरिया से प्यार रजऊ
रतिया में तरस गइल खाट रजऊ।
कवन जादू कइल, बतावा रजऊ,
दिलवा में बस के देलह काहे घाव रजऊ?

RSD

वक्त


वक्त के नसीब में लिखे हैं कुछ किस्से
हम कहीं, तुम कहीं, पर जुड़े हैं दिल के रिश्ते।
यकीं नहीं होता की हम कभी साथ चलें थे
मगर साथ चले थें कभी हम, यही सोच के जी रहे.

वो सेंट्रल बिल्डिंग, वो हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट,
कहाँ -कहाँ ना अपनी हुई थीं बातें,
वक्त की धारा में हमारी वो राहें कहीं खो गए।
मगर हवाओं में आज भी बसी हैं तुम्हारी यादें।

तुम्हारी हंसी की गूंज, आज भी दिल में हैं समाई,
मुस्कान ओठों पे बस तुम्हारे नाम से हैं आई।
भले ही दूरियां दूर रख रही हैं हमें तुमसे,
मगर तुम्ही धड़काते हो अब भी दिल की ये धड़कनें।

वक्त के नसीब में लिखे हैं कुछ किस्से,
हम कहीं, तुम कहीं, पर जुड़े हैं दिल के रिश्ते।
भले ही हम बुड्ढे, और साथ चलने की राहें पुरानी हो गईं,
मगर उन राहों की मिट्टी की खुसबू आज भी हैं हमारे दिल में।

RSD

हरियर घास रजऊ


अंगिया के कइलह अंगार रजऊ
छोड़ के आपन सुनर बिहार रजऊ.
का होइ ई दौलतात – शोहरत
जब देखलह ना हमर श्रृंगार रजऊ.

छोड़ के माटी, खेत, खलिहान,
भूल गइल आपण पहचान रजऊ.
दे गइलह अइसन विरहा के आग
अब के सुनी हमर मन के पुकार रजऊ.

तू ना सही कोई और चरी
चौंरा के ई हरियर घास रजऊ.
अंगिया के कइलह अंगार रजऊ
छोड़ के आपन सुनर बिहार रजऊ.

RSD