हरियर घास रजऊ


अंगिया के कइलह अंगार रजऊ
छोड़ के आपन सुनर बिहार रजऊ.
का होइ ई दौलतात – शोहरत
जब देखलह ना हमर श्रृंगार रजऊ.

छोड़ के माटी, खेत, खलिहान,
भूल गइल आपण पहचान रजऊ.
दे गइलह अइसन विरहा के आग
अब के सुनी हमर मन के पुकार रजऊ.

तू ना सही कोई और चरी
चौंरा के ई हरियर घास रजऊ.
अंगिया के कइलह अंगार रजऊ
छोड़ के आपन सुनर बिहार रजऊ.

RSD

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