छलकने से पहले


छलकने से पहले तेरे आँसु खबर हो जाती है मुझे
तुम्हे अब भी यकीन नहीं की किस कदर चाहा है तुझे
तेरी ख़ामोशी को तुझसे पहले समझ लेता हूँ मैं,
तुझसे पहले राह के काँटों पे पाँव रख लेता हूँ मैं.

तेरे इश्क़ का सागर इतना गहरा है मेरे दिल में,
डूबकर हर बार बस नया साहिल मिलता है इसमें.
तू चाहे जितना भी दूर है मुझसे अभी इस पल में,
मैंने दिल की धड़कनों में सदा ही पाया है तुझे.

RSD

Leave a comment