भोलेनाथ की जमीन से, शिव के आशीष से
चल पड़े हैं हम तो अपनी नजर लक्ष्य पे साधे।
ना भय कोई मन में, ना बंधन कोई चिंतन में
बसे हैं बाबा दिल में, तो पावों को बेड़ी क्या बांधे?
RSD
भोलेनाथ की जमीन से, शिव के आशीष से
चल पड़े हैं हम तो अपनी नजर लक्ष्य पे साधे।
ना भय कोई मन में, ना बंधन कोई चिंतन में
बसे हैं बाबा दिल में, तो पावों को बेड़ी क्या बांधे?
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