ये वीरों की है अधूरी गूँज


मैं तन्हा हूँ तन्हा तुम्हारे लिए
मुझसे मेरी तन्खा ना पूछ।
मेरे नसों में है साँगा का ख़ून,
मेरे दर्द की दवा ना ढूंढ।

मैं लड़ा अपने जज़्बातों से
जैसे सांगा ने घायल जूनून।
हर ज़ख्म में एक हल्दीघाटी है,
हर साँस में राजपूताना का जुनून।

मेरी आँखों में धूल नहीं, धुंध है,
इस इतिहास को मुझसे मत पूछ।
मैं टूटा हूँ जैसे चित्तौड़ की दीवारें,
मुझमे किले की मूरत मत ढूंढ।

वो जो पूछे हैं दिल की बातें,
उन्हें रणभूमि की राख सूंघ।
ये प्रेम नहीं कोई कविता मात्र,
ये वीरों की है अधूरी गूँज।

मैं चुप हूँ तो समझ लेना ये,
मौन भी एक शौर्य की पुँछ।
जो गिरा नहीं हारा नहीं कभी,
उसका बेटा हूँ — मत पूछ।

RSD

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