थोड़ा ठहरकर


तू मिलता, तो मुस्कुरा भी लेता,
शहर में तेरे थोड़ा ठहरकर।
तेरे बिना कुछ भी नहीं बाकी,
ज़िंदगी बिखर गई, एक रात संवरकर।

हवाओं ने भी तेरा हाल पूछा,
मैं जब भी निकला इन गलियों से होकर।
हर रास्ता कुछ कह लेगा फिर से मुझसे
जो चले हम दो कदम साथ मिलकर।

RSD

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