वो जिनको मिली मोहब्बत की कई दुकानें,
उनकी किताबों में भी मेरा चर्चा है।
मैं यूँ ही नहीं बदनाम हूँ ज़माने में,
उनका अब भी मायके, आना-जाना है।
हर इक मोड़ पे आज भी रुक जाते हैं पाँव मेरे
जैसे शहर में यहीं-कहीं उनका ठिकाना है।
जो बात नहीं कह सके थे बरसों तक,
ये कलम लिख रही अब वो ही अफ़साना है।
सारे समंदर कुछ भी नहीं, एक इश्क़ के दर्द के आगे,
उसकी प्यास मिटती नहीं, हज़ारों बाहों में उतारकर।
लब मुस्कुराए भी तो क्या, आँखें बयाँ कर बैठीं राज,
छुपा न सका दिल का आलम, हर इक नजर को टालकर।
वो हर किसी में ढूँढती है शायद मेरी परछाईं,
मैं रह गया हूँ खामोशियों में खुद को टटोलकर।
मेरी बाँहों में कोई उतरती नहीं अब उम्रों से,
बैठा हूँ तन्हाई की छत पर, सारी प्यास समेटकर।
कई बार चाहा उसे भुला दूँ इस कदर,
पर लौट आता हूँ उसी मोड़ पर, सब कुछ भुलाकर।
वो जो गया तो लौट कर देखा भी नहीं पीछे,
मैं रह गया उस रास्ते को हर रोज़ सँजोकर।
RSD