ऐसा हिन्दुस्तान हो


नारी का सम्मान हो,
ऐसा हिन्दुस्तान हो।
शहर हो या गाँव हो,
खेत या खलिहान हो।
ना हो पाँवों में बेड़ियाँ,
ना जिस्म पे कोई घाव हो।
नारी का सम्मान हो,
ऐसा हिन्दुस्तान हो।

आते-जाते नयनों से,
घर का श्रृंगार हो।
उसके मुस्कानों से,
हर एक त्योहार हो।
ना हो डर का साया कोई,
ना अपमान की मार हो।
उसकी इच्छा, उसका सपना,
उसका भी अधिकार हो।

बोल सके वह खुले मन से,
ऐसा संवाद हो।
पढ़े-लिखे हर पंचायत में,
उसके शब्दों का मान हो।
ना हो वो सिर्फ़ रसोई तक,
उसका भी ये संसार हो।
नेता, वैज्ञानिक, सैनिक भी,
हर रूप में वो स्वीकार हो।

दया, और ममता के आगे भी
नारी की तो एक पहचान हो।
शक्ति, प्रेम, करुणा की,
जीती-जागती जान हो।
सीता जैसी सहनशीलता,
लक्ष्मी जैसा दान हो।
दुर्गा जैसी हुंकार भरी,
उसकी भी पहचान हो।
नारी का सम्मान हो,
ऐसा हिन्दुस्तान हो।
जहाँ वो जी सके खुलकर,
ऐसा आसमान हो।

RSD

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