बदलते रिश्ते


जो रिश्ते बदलते हैं हवाओं के झोंकों से,
वो कहाँ फलदार वृक्ष बनते हैं.
ना जेड गहरी, ना शाखाओं में ताकत,
वो तो मौसम के साथ ही ढहते हैं.

रिश्ते तो वो हैं जो आँधियों से उलझते हैं,
हर तूफ़ान में और भी मजबूत बनते हैं.
वो विश्वास की मिटटी में पलते हैं,
सहनशीलता की खाद से फलते हैं.

वक्त चाहे जितनी भी धूप दे,
वो छाँव बांके साथ चलते हैं.
ना टूटते हैं, ना झुकते हैं,
बस हर मोड़ पे ने रंग खिलते हैं.

RSD

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