धीरे-धीरे अंगिया के अंगार कइल
राजा, रतिया में जे तू प्यार कइल.
रहल सुन्दर काश्मीर, बदन
ओकरा के पूरा बिहार कइल.
धीरे-धीरे, धीरे गहिर घाव कइल.
पूरा पाके भी, कह तहार मन कहाँ भरल?
दे देहनी आरक्षण, त जंगल राज कइल.
धीरे-धीरे अंगिया के अंगार कइल
धीरे-धीरे, धीरे गहिर घाव कइल.
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