दिल में सदा बिहार ही रहा


ना दर्द में रहा, ना सफर में रहा,
दिल मेरा जाने किस तरफ में रहा.
ना आहें निकली, ना दुआएं निकली,
मर्ज मेरा यूँ ही हमेसा रहस्य में रहा.
मैं बुलाता रहा, वो छिपती रही,
मेरा चाँद हमेसा घटावों में रहा.
सावन के बादल छा भी गए पर
माटी और बाग़ मेरा सूखा और प्यासा ही रहा.
हूँ किसान के खून से मैं
हल काँधे पे और कुदाल हाथ में रहा.
महफ़िल में तुम्हारे मैं बैठने लगा हूँ
पर दिल में सदा बिहार ही रहा.

RSDd

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