ममता


हैं तारें आसमान के, बेचैन धरती पे आने को
है ममता बस यहीं, प्यार और लाड बरसाने को.
जो कल्पवृक्षः और कामधेनु ले कर बैठें हैं
उनको भी पता है हम पिता की गोद में बैठें हैं.
बात जो आ गयी अभिमन्यु की,
अर्जुन, श्री कृष्णा से मख मोड़ के बैठे हैं.

RSD

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