सब है माया, माया का खेल ही तो रचने आए है.
दो नैना तेरे ए नारी, बस मर्द को छलने आए हैं.
जो हैं बाहों में उनका भी क़त्ल होगा कल,
बस हम बाहों में आने से पहले ही मारे गए हैं.
जिनको यकीन है की ये मेरी, बस मेरी ही बन गयी
इसी यकीन से कितने पहले यहाँ सुलाए गए हैं.
बादल बरसते नहीं है,
बिजलियाँ उन्हें बेचैन कर देतीं हैं
रोने के लिए.
आदमी घर बसता नहीं है
औरत मजबूर कर देती हैं
चारदीवारी में ताउम्र रहने के लिए.
धुप में जितने छावं भी नहीं
उतने उसके पाँव है हसीं।
RSD