माँ


मिट्टी ना जवान होती है, ना बूढी होती है
क्यों की, मिट्टी तो माँ होती है.
माँ ना इधर होती है, माँ ना उधर होती है
वक्त जैसा भी हो, बस माँ ही साथ होती है.

इश्क़ हुस्न से नादान करते हैं
जिस्म से गुनहगार करते हैं
हम राजपूत,
बस मिट्टी पे खुद को ख़ाक करते हैं.

माँ ना अमीर होती है, ना गरीब होती है.
उसकी गोद में जो आया, उसे आबाद करती है.
लहलहाती है, खिलखिलाती है
खेत-से-खलिहान, आँगन-से-बथान
गाछी, घोंसार, बस एक पाँव पे
दिन-रात, बिना थके चलती रहती है.

माँ ना खाती है, ना पीती है
जो भी मिले, जो भी दिखे
कच्चा-पका, खट्टा-मीठा
बस बेटे को खिलाना चाहती है
बस बेटे को खिलाती है.

RSD

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