हमसे इश्क़ करने के लिए यूँ दावं -पेंच ना करो
कभी बैठ कर मेरे संग दान-दक्षिणा करो.
जिसकी चाहत में दरिया सुख गयी,
उस दरिया में फिर बदली बरसायेंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
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हमसे इश्क़ करने के लिए यूँ दावं -पेंच ना करो
कभी बैठ कर मेरे संग दान-दक्षिणा करो.
जिसकी चाहत में दरिया सुख गयी,
उस दरिया में फिर बदली बरसायेंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
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राउर भोली रे सुरतिया, मोहे मनवा हमार हो
प्रभु आवतानी अयोध्या, त तानी आ जाएम कहियो बिहार हो.
मन तो मोह लेते हो प्रभु मोहिनी इन आँखों से
अब तो रोज देखेंगे जब अयोध्या में विराजोगे।
चरणों से आपके मेरी दूरी अब तो मिटने वाली है
प्रभु दुनिया हमारी आज से हाँ बदलने वाली हैं
की आपके ही चरणों में हर साल दिवाली मनाएंगे।
दरियावों को किनारों की चाहत नहीं होती
समंदर तक आते-आते वो आग नहीं होती।
तू घमंड में जिसे पाकर, इतहास हैं उसका,
वो किसी की नहीं होती।
हम बिहारी हैं, नाप लेके हैं आँखों से आकार का
हम सी दें चोली तो वो छोटी नहीं होती।
तू जिसे चाहे चुन ले, तेरा अधिकार है
सबका ससुराल बिहार हो ऐसी किस्मत नहीं होती।
कितना तोड़ोगे हमको नजरों को चुराकर हमसे
हम तो पहले ही टूटे हैं दिल को लगा कर तुमसे।
इश्क़ में तुम्हारी गली का नजराना बहुत है
और इश्क़ में हमारी गली में मयखाना बहुत है.
तुम्हे मिलता है सबकुछ बिना पुकारे
हमारी पुकारों में बस तेरा नाम बहुत है.
कातिल की नजर को सलाम करके
हम बैठ गए है इश्क़ में नाकाम होके।
दर्द भी बता दें तो क्या भला
वो दवा पिलाती भी हैं तो भाईजान कहके।
I am taking alcohol as I can not take you
I am sipping it slowly as I can not do deep in you
The whole world is meaningless if ours legs don’t hold each other
I am jerking as I cannot jump on you.
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My sweetheart use shampoo on the boobs and its really helps us to ignite the night..
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चोर ले गइल चोली खोलके
रह गईनी हम ओठ दाब के
राजा, तहरे इजतिया के ख्याल रहल हो
ना त जार देतीं मुआना के बोरसी के अगिया से.
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तेरी मोहब्बत में सिर्फ हम ही तन्हा नहीं हैं
जिसने भी देखा है तुम्हे, फिर चैन से बैठा नहीं है.
ए चाँद, तू सिर्फ चाँद नहीं है,
तू मंजिल है, जलन है, आग है, द्वेष है, इंतिजार है, इन तारों का.
तुम्हारा जिस्म, सिर्फ एक जिस्म नहीं है,
ये प्यास है, मयखाना है, अरे जाम हैं हम दीवानों का.
ये शाम, सिर्फ एक शाम नहीं है,
ये दर्द है, आंसू हैं, यादें हैं तेरी बाहों का.
ये बिहार, सिर्फ एक प्रदेश नहीं हैं,
ये नाम है राजेंद्र प्रासाद, जयप्रकाश, महामाया प्रसाद,
अरे नाम है भारत के मस्तक के सितारों का.
हमें याद है तेरी जुल्फों के साराएँ रातों का काट जाना
अब भी ये रातें तेरी यादों से ही कटती हैं.
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ह्रदय की तुम स्वामिनी, मेरे मन में विराजी हो
चंचल नयनों से वेधती, हर पल मेरी साँसों की वेदी हो.
सरिता सी नित बह रही, कुरेदती हो पाषाण को
टूट-टूट, बिखर रहा मैं नित, तुम प्रबल-प्रखर-प्रचंड, तरंगिणी हो.
तुम्हारे मतवाले नयनों की चाल, जैसे अरण्य में स्वछंद विहरति मृगनी हो.
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जल रही है ज्वाला मन में, जैसे कोई अंगार है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
प्राणों की वेदी भी प्रभु आप पे निसार है.
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
दीखते नहीं हैं सूक्ष्म कांटें अब तो हाँ इन आँख से
बहरती -सुहारती हूँ पथ को अपने हाथ से.
इस निर्जन कुटिया में प्रभु बस आपकी ही आस है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
क्या दिन और क्या रात प्रभु, बिन आपके सर्वत्र अन्धकार है
बरसात-गर्मी-बसंत, बिन आपके, सब एक सामान है.
कापंते-जर्जर तन से ये आखिरी गुहार है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
उड़ जाए ये प्राण पखेरू, उसके पहले प्रभु-चरण पखारूँ
इसके सिवा ना और कुछ भी ह्रदय में बसी चाह है.
इस निर्बल-अबला की लाज, प्रभु आपके ही हाथ है.
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
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आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तन से गंदे, पेट के भूखे, बिन पहने, कपडे
फिर से करेंगे तुम गोरों की चाकरी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
फिर जय-जय कारा, होगा तुम्हारा
तो क्यों खाई सालों तक सीने पे गोली
फीकी हैं तुम्हारे सौंदर्य के आगे हमारे शहीदों की कुर्बानी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी।
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