The Nagercoil Express


The Nagercoil Express was running at full speed.
Our gang—including me—waited at Pune Junction,
holding onto a single belief.

As the train stopped, we ran along the platform,
my friends by my side,
trying to help me find her
without a photo, without a clue.
None of them had seen her before,
but together we searched,
while I alone knew her face.

Suddenly, I heard a scream—my name.
There she was, her face glowing,
her mother standing beside her, surprised.

She introduced me,
and I saw her mother ignite with emotion.
Her daughter shimmered with worth,
proving herself in her mother’s eyes,
while her mother silently weighed what to do next.

The train gained momentum.
She whispered for me to step down.
On the platform, I felt as though I could rule life with her as queen.
I felt like a maharana victorious at Haldighati,
winning unexpectedly,
for the real challenge had been finding her
without a date, a reservation, or even the train’s name.

RSD

माया


सब है माया, माया का खेल ही तो रचने आए है.
दो नैना तेरे ए नारी, बस मर्द को छलने आए हैं.
जो हैं बाहों में उनका भी क़त्ल होगा कल,
बस हम बाहों में आने से पहले ही मारे गए हैं.
जिनको यकीन है की ये मेरी, बस मेरी ही बन गयी
इसी यकीन से कितने पहले यहाँ सुलाए गए हैं.

बादल बरसते नहीं है,
बिजलियाँ उन्हें बेचैन कर देतीं हैं
रोने के लिए.
आदमी घर बसता नहीं है
औरत मजबूर कर देती हैं
चारदीवारी में ताउम्र रहने के लिए.

धुप में जितने छावं भी नहीं
उतने उसके पाँव है हसीं।

RSD

कू-ए-यार में


किसकी मोहब्बत सजी है नसीब की राह में,
यार ज़मीन भी दे, जिस्म भी दे—तो क्या?
बेवफ़ाई ही तो रहती है कू-ए-यार में।

दिल ने तलाश की थी सुकूँ उसकी आगोस में,
घाव ही घाव मिले हमको कू-ए-यार में।

हमने भी चाहा था उम्र गुजरे उसकी बांह में,
नाम तक ना रहा अपना अब कू-ए-यार में।

रातें गुज़र गईं उसकी चाह की याद में,
ख़्वाब टूटते रहे चुपके चुपके हिसार में।

जिस्म और जाँ भी मिले हों तो क्या हुआ ऐ दिल,
वफ़ा कभी नहीं मिलती कू-ए-यार में।

हम तो खुश थे उसके झूठे इकरार में,
अब नाम भी कोई याद करता नहीं कू-ए-यार में।

RSD

Inspired by the Sher, “कितना है बद-नसीब ‘ज़फ़र’ दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में”, this is my reply to it.

बहनों का सम्मान हो


बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.

गोद में खेलाया है
हांथों से खिलाया है
चुम-चुम के गालों को
रोते से हंसाया है.
आंसू भी निकले तो
भाइयों के आँख हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.

पकड़कर उँगलियों को
स्लेट पे लिखना सिखाया है
भारी हमारे बस्तों को जिसने
कांधों पे अपने उठाया है.
मायके के आँगन पे बस
उनका ही अधिकार हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.

पूर्वज थे एक हमारे जो सब कुछ
अपना मिटटी पे लुटा गए.
ये क्या वक्त आ गया है की
हम अपनी बहनों की भुलाने लगे.
हर तिजोरी, ताले की चाबी
बस अपनी बहनों के हाथ हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.

तोमरों का लहू अब भी जिन्दा है जमीं
जिसका कोई नहीं, उसके हम हैं भाई.
बस राखी के ही दिन नहीं
सालों भर मायके पे अधिकार हो.
बहनों के क़दमों में निसार,
जन्नत, ताज और संसार हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.

RSD

दम्भ है वीरों का


टूट कर भी तारे अम्बर के जमीन पे आते नहीं
ये ही दम्भ है वीरों का, वो हार से शर्माते नहीं।

RSD

ये उम्मीदें तुमसे मिलन की


घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
छोटी -से छोटी होती जा रहीं
ये आसमा और ये जमीन
पर, दूरी – की – दूरी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.

सोचा था की पटना से एक पल बांधूंगा
चलेंगे नंगे पाँव जिसपे हम और तुम.
ये लकीरे लिखी – की -लिखी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.

अब नहीं है इरादा
नहीं है जूठी ही आशा
टूटी-की-टूटी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की

मिलता भी कोई तो कैसे?
हमने दिल में बसाया है तुमको
उजड़ी-की-उजड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.

RSD

छल जाना प्रेम में


छल जाना प्रेम में हाँ, प्रभुता का प्रमाण है
येही तो वो पल है प्यारे, जब भक्त, भगवान् पे बलवान है.
जिस नारायण को छलिया कह असुर व्याकुल रहते थे
वो नारायण भक्तों पे अपने नंगे पावँ दौड़ते थे.
पी लेना विष झूठ का प्रेम में, प्रभुता का प्रमाण है
यही तो वो पल है प्यारे, जब महाकाल बन जाते भोलेनाथ हैं.

RSD

पिता के पाँव को


हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

जब-जब हम थे तुतलाये, चूमा हमारे गाल को
जब -जब लौटे थे जीत के, चूमा हमारे माथ को.
पर जिस दिन था दुनिया को रौंदा, बोले पिता
मेरे माँ को, हे देवी, प्रणाम तुम्हे, नारी तुम महान हो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

तुमने पिता बनाया मुझको ऐसे हाँ पुत्र का
जो धरा पे रम रहा लिए दम्भ मेरे नाम का
क्षण -क्षण में ह्रदय में मेरे जो आनंद का भण्डार भरें
और पल-पल में सीना मेरा करता है विशाल जो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

RSD

पिता एव परमसत्यः


पिता एव परमसत्यः,
पिता एव परमेश्वरः।
पिता एव अमृतस्वरूपः,
पिता एव अजरामरः।

पिता एव धर्मग्रन्थः,
पिता एव गीताज्ञानम्।
पिता एव नीलकण्ठः,
पिता एव नारायणः।

पिता एव शाश्वतशान्तिः,
पिता एव कर्ममार्गः।
पिता एव ब्रह्मवाणी,
पिता एव सत्यसारः।

पिता एव प्रथमप्यारः,
पिता एव पथप्रदर्शकः।
पिता एव जीवस्रोतः,
पिता एव मोक्षद्वारः।

पिता एव दीपज्योतिः,
पिता एव दिशां सारः।
पिता एव आदित्यसमानः,
पिता एव अमराधारः।

पिता एव वटवृक्षः,
पिता एव छायावरदानम्।
पिता एव तपस्त्यागः,
पिता एव समर्पणमहान्।

पिता एव आकाशः,
पिता एव भूमेः मानः।
पिता एव गति: शक्तिः,
पिता एव प्राणाधारः।

पिता ही परम-सत्य,
पिता ही परमेश्वर।
पिता ही अमृतस्वरूप,
पिता ही अजर-अमर।

पिता ही धर्म-ग्रन्थ,
पिता ही गीता-ज्ञान।
पिता ही नीलकंठ,
पिता ही नारायण।

पिता ही शाश्वत शांति,
पिता ही कर्ममार्ग।
पिता ही ब्रह्मवाणी,
पिता ही सत्य-सार।

पिता ही पहला प्यार,
पिता ही मार्गदर्शक।
पिता ही जीवन-स्रोत,
पिता ही मोक्ष-द्वार।

पिता ही दीप-ज्योति,
पिता ही दिशाओं का सार।
पिता ही सूर्य समान,
पिता ही अमर आधार।

पिता ही वट-वृक्ष,
पिता ही छाया का वरदान।
पिता ही तप और त्याग,
पिता ही महान समर्पण।

पिता ही आकाश,
पिता ही भूमि का मान।
पिता ही गति और शक्ति,
पिता ही प्राण-आधार।

RSD

जिंदगी


जो रहा न जिंदगी का, वो ही जिंदगी है
क्या भुलाऊं तुझे, तू ही मेरी जिंदगी है.
आसमा को अब तक खबर ही नहीं
कोई मिल जाए एक रात तो हर रात संवर जाए
मेरी सुनी सी मोहब्बत में कोई बहार आ जाए.
हर गुजरता पल, एक जाम सा मिले मुझे
मरहम बनकर कोई ये दर्दे-दिल हर जाए.

जो बदल जाए उसे मौसम कहते हैं
जो ठहर जाए उसे लहार कहते हैं
जो बरस जाए उसे बादल कहते हैं
जो बस जाए दिल में, उसे जख्म कहते हैं.

जो गम तेरे जाने का है
जो गम तेरे खोने का है
वो ही मेरी जिंदगी है
वो ही मेरी तन्हाई है.

RSD