प्रेम प्रुस्कृत नहीं हो सकता
सिंह भयभीत नहीं हो सकता।
तिमिर के शिविर में
एक दीप भी ग्रसित नहीं हो सकता।
माँ, माँ जब तक तुम हो संग मेरे
तुम्हारा राम कभी पराजित नहीं हो सकता।
Rifle Singh Dhurandhar
प्रेम प्रुस्कृत नहीं हो सकता
सिंह भयभीत नहीं हो सकता।
तिमिर के शिविर में
एक दीप भी ग्रसित नहीं हो सकता।
माँ, माँ जब तक तुम हो संग मेरे
तुम्हारा राम कभी पराजित नहीं हो सकता।
Rifle Singh Dhurandhar
प्यार का बंधन छोटा सा
बंध जाओ तो दुनिया छोटी सी.
दिल में उतरना है मुश्किल
उतर जाओ तो, हर मौसम फीका सा.
Rifle Singh Dhurandhar
मौसम कह रहा है न हैरान हो
बादलों में फिर से कोई नाम है सिवान से.
और वो जो फूल हर मौसम में खिल लेते हैं
वो आते हैं हमारे और तुम्हारे जैसे किसी गावं से.
वो फूल जो खिल कर मेरा न हुआ-२
किसी मयकसे में मुझे नशा न हुआ.-२
और किस्मत से क्या शिकवा करोगे परमीत
अम्बर पे चाँद आ के भी मेरे, मेरा न हुआ, मेरा न हुआ.
Rifle Singh Dhurandhar
तुम प्रेमिका हो मेरी, श्वेत रंग धारी
माँ शारदे की याद, हर पल में लाती।
पूजता हूँ हर रोज माँ शारदे को
की बना दे अपनी जोड़ी।
Rifle Singh
तुम हार्वर्ड नहीं हो
मेरा हार्ट हो प्रिये।
तुम्हे पाने के लिए
रह गया मैं अकेला हूँ प्रिये।
तुम सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं
मेरा ख्वाब हो प्रिये।
बस तुम्हारे साथ चलने के लिए
रह गया मैं अकेला हूँ प्रिये।
सारे ख्वाब टूट गए, अरमान टूट गए
पिता के लाडले गोद से छूट गए
की तुम सिर्फ एक मुकाम तो नहीं
मेरी सांसे हो प्रिये।
तुम्हे पाने के लिए
रह गया मैं अकेला हूँ प्रिये।
It was a dream to be here
Still, a dream exists in my heart
To be with you forever.
Rifle Singh Dhurandha
As I see the mirror
After your given marks
I feel to be in your arms
Like tangled DNA.
Our arms and legs having the bond
Like A, T, G, and C
To have a semi-conservative life.
Rifle Singh DHurandhar
मैं तराशा गया हूँ इस कदर दर्द में
ना कोई ख्वाब है ना कोई आशा मन में.
पंख तो फड़फड़ाते हैं हर घड़ी ही
पर ना आसमा है ना ही उड़ान नभ में.
फूल खिले हैं काँटों में, या कांटें ही साथ हैं
जिन्दी ऐसी उलझी, कुछ भी नहीं रहा बस में.
Rifle Singh Dhurandhar
कोई गरीब नहीं है, कोई अमीर नहीं है.
चंद सिक्कों का खेल है सब, पूरी तस्वीर नहीं है.
ये हंस-खेल रहे, उन्हें कोई सुकून नहीं है.
संसाधनों की लड़ाई है ये, कोई तकदीर नहीं है.
उठो, बढ़ो लड़ो और संघर्ष करो, महाराणा बन के
पढ़ो और बोलो की मुग़ल जालिम थे
वो कोई जिल्ले-इलाही नहीं थें.
इतना क्या शिकायत खुद से मुंतशिर?
ये आवाज और कलम किसी और की नहीं है.
Dedicate to Kavi Manoj Muntashir.
Rifle Singh Dhurandhar
ये किसान जमीन के हैं, ये पंक्षी आसमान के हैं
ये खुले बिचारो वाले निशान उस जहाँ के हैं.
और ये क्या कह रहे हो तुम सत्ता में आकर?
ये शब्द इंसान के नहीं, किसी शैतान के हैं.
मिटाने की हमें, हर जायज-नाजायज जोर कर लो तुम
पहली पंक्ति में कई आने को अभी बेताब से हैं.
भूख से लड़े हैं हम, क्या खूब लड़े हैं हम
मेरे आँगन से तुम्हारे आँगन तक
बूढी दादी ने पीसे जाँत, जागकर कई रातों को
उनकी साँसों का सैलाब, अब भी हमारे सीने में ज़िंदा से हैं.
मिटाने की हमें, हर जायज-नाजायज जोर कर लो तुम
पहली पंक्ति में कई आने को अभी बेताब से हैं.
हृदय टूटे तो टूटे, जंग में साँसे ना टूटे?
साँसे टूटे तो तो टूटे, हल हाथों से ना छूटे
तुम चाहे मीठे ख्वाब दिखा के जितना बरगला लो
सच्चे किस्से अब भी हमारी जुबान पे हैं.
मिटाने की हमें, हर जायज-नाजायज जोर कर लो तुम
पहली पंक्ति में कई आने को अभी बेताब से हैं.
Rifle Singh Dhurandhar
हम छापरहिया
जैसे घूमे है पहिया
दुनिया घुमा दें.
गोरी तेरी पतली कमर क्या है?
हम तो उड़ती चिड़िया फंसा लें.
हम छापरहिया
जैसे चमके है बिजुरिया
दुनिया चमका दें.
गोरी तेरी पतली कमर क्या है?
हम तो उड़ती चिड़िया फंसा लें.
हमें काट सके ना नयन-कटार
हमें क्या बाँधे कोई बयार?
किस्मत के ऐसे धनी हम
की बंजर में फूल खिला दें.
गोरी तेरी पतली कमर क्या है?
हम तो उड़ती चिड़िया फंसा लें.
हम से भागे भूत-पिचास
हम लगा दें बर्फ में आग
ऐसे खिलाड़ी हैं हम
आँखों से दिल को चुरा लें.
गोरी तेरी पतली कमर क्या है?
हम तो उड़ती चिड़िया फंसा लें.
Rifle Singh Dhurandhar