गज-ग्राह संग्राम


दो नैनों के भवर में सारा जग डूबा है
हे जगत के स्वामी तुम्हारा भक्त डूबा है.
आधा पहर ढल गया और सागर अथाह है
हे जगत के स्वामी तुम्हारा भक्त डूबा है.
सम्पूर्ण बल क्षीण हुआ, ग्रीवा तक अब नीर है
अंत समय में स्वामी अब तुम्हारा ही सहारा है.

Rifle Singh Dhurandhar

पुरवाई मैं झेल रही


मेरे मौला मैं थक गयी हूँ राहत के इंतजार में
कोई तो एक पल लिख दो, चैन मिले इस प्यार में.
आँखों में अश्क, और बेचैनी है रातो को
कब तक बैठूं यूँ खोल के किवाड़ मैं?
बेताब है टूटने को चूड़ियाँ और खनकने को पायल
दर्पण भी उल्हना मारे देख के मुझे श्रृंगार में.
अनाड़ी जाने बैठा है किस सौतन के ख्वाब में?
और पुरवाई मैं झेल रही विरहा की इस आग में.

Rifle Singh Dhurandhar

दर्द


दर्द है, तो जी लेने दो.
सिसक -सिसक कर ही सही
दो कदम चल लेने दो.
दर्द नहीं रहा तो हम नहीं होंगे।
जब तक जिन्दा हैं
जाम पी लेने दो.

Rifle SIngh Dhurandhar

क्या पालोगे धुरंधर?


जब दिल टुटा था, संभालना मुश्किल था
अब संभल गया हूँ, तो फिर टूटना मुश्किल है.

इस जमाने की भी क्या खूबी है?
की इसमें बेवफा को, बेवफा ही कहना मुश्किल है.

जो करते हैं वादे हर घड़ी प्यार -मोहब्बत के
उनका किसी पल भी, वादों पे टिकना मुश्किल है.

हया सारी निगाहों की उनकी है झूठी
की इस समंदर में किसी का भी टिकना मुश्किल है.

क्या पालोगे धुरंधर उनके आगोश में जाकर?
जिनके काँधे पे आँचल का भी टिकना मुश्किल है.

Rifle Singh Dhurandhar

चरित्र


जब दिल टुटा था तो संभालना मुश्किल था
अब जब संभल गया हूँ, तो फिर टूटना मुश्किल है.

मुझसे मत पूछो, वो कैसी हैं, कहाँ हैं?
बता दो उनको, हम कैसे हैं, कहाँ है?

मैं कोई दुर्योधन-दुशाशन नहीं जो उनका चीरहरण करूँ
ना उनका चरित्र ऐसा, जिसे पतित करने को मैं द्रुत-क्रीड़ा रचूं।

Rifle Singh Dhurandhar

पिता तुम्हारी चरणों में


पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.
पिता तुमसे बिछुड़कर अब मेरा जीवन धूल सामान है.
कहाँ मैं फिर उड़ा कभी, कहाँ अब वो मेरा आसमान है?
दाना तो चुग ही लेता हूँ, पर कहाँ अब वो मेरी उड़ान है?
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.

एक -एक करके हार रहा हूँ, हर युद्ध मैं बिना आपके रण में
विफल हो रही है मेरी हर चेष्टा, अटल मेरा परिणाम है.
विनती अब बस इतनी ही है, अगर सुन रहा है विधाता
हर जन्म में पुत्र आपका रहूं, हृदय की बस ये ही पुकार है.
गोद में तुम्हारे जो अमृत मिला, वो कंठ पे बन के अनंत प्यास है.
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है

Rifle Singh Dhurndhar

Alone in happiness


The dream I have is dying

I cannot do anything to make it survive.

The color of the sky 

And the smell in the air 

Keep reminding me that 

I am not from here. 

The enjoyment of technology 

And the excitement of advancement in technology 

Donot provide any happiness. 

It just makes us to forget from where are.

Social medias are increasing 

Without any social value.

We are creating jungles of selfie

And not of trees. 

We are sharing our happiness 

Without involving anyone.

In the last, we are alone in our happiness.

The more I want to go back 

The more I am addicted to it.

We shout we are creating a world

But it is pseudo, and virtual. 

Rifle Singh Dhurandhar

तन्हाई


वो अब लौट नहीं सकती
और मैं दिल बदल नहीं सकता।
पति, देवर, सास-ससुर, बच्चे
जिंदगी का हर रंग जिया उसने।
मैं उस मुकाम पे आ गया की
तन्हाई के सिवा कोई रंग
भर नहीं सकता।

Rifle Singh Dhurandhar

ताउम्र


ताउम्र प्यार की आरजू रही.
ताउम्र वो ख़्वाबों में आती रहीं।
ताउम्र सीने में एक बेचैनी सी रही
ताउम्र वो छज्जे से मुस्कराती रहीं।

ताउम्र मैं दौलत कमाता रहा
ताउम्र झोली मेरी खाली रही.
ताउम्र मेरे हौसले टूटते रहे
ताउम्र माँ मेरी, हौसले बढाती रही.

Rifle Singh Dhurandhar

Lily from a valley


Lily from a valley
Taught me a dance
How to make a move
While a girl is in arms.

With every good move
She gave a kiss as a reward.
At the beach near Santa Monica
She told,
“you can do whatever you want.”

Rifle Singh Dhurandhar