जानता हूँ तुम्हारा हर इरादा सनम
इस चांदनी रात में, किससे वादा किया है
और किससे आज मिलने जाओगे?
Dedicated to Nusrat Fateh Ali Khan
परमीत सिंह धुरंधर
जानता हूँ तुम्हारा हर इरादा सनम
इस चांदनी रात में, किससे वादा किया है
और किससे आज मिलने जाओगे?
Dedicated to Nusrat Fateh Ali Khan
परमीत सिंह धुरंधर
रूप और धुप दोनों पल – दो – पल के मेहमान हैं
ढलते हैं, तो बचता कोई नहीं इनका निशाँ हैं.
वृक्ष अगर साथ हो तो फिर धुप भी मीठी छावं हैं
वफ़ा में घुला रूप तो अमृत सामान है.
परमीत सिंह धुरंधर
समंदर को बाँध लिया मैंने
कलंदर को बाँध लिया मैंने
बस एक वो ही ना बंध सके हमसे
दिलो -जान से जिससे मोहब्बत किया मैंने.
Dedicated to my favorite poet Shiv Kumar Batalvi.
परमीत सिंह धुरंधर
चाँद मेरी आँखों का इशारा जानता है
क्या करता है Crassa ये जमाना जानता है?
अच्छा है की तू मेरी ना बनी, आज भी तेरे पीछे
दिल मेरा, दीवाना भागता है.
XXXXXXXXX part2 by wife XXXXXX
यूँ शहर का नशा ना किया कर Crassa
तेरे लिया दही का निकला है मक्खन ताजा।
यूँ सौतन के पास ना जाया कर राजा
सारी रात मुझको, मेरा जोबन तोड़ता है.
दर्द क्या है विरह का, ये मेरा ह्रदय जानता है?
कहाँ – कहाँ मुँह मारता है Crassa, ये जमाना जानता है?
यूँ जन्मों का बंधन ना तोड़ो तुम Crassa
तुम्हारे लिए उठाउंगी जीवन की हर पीड़ा।
यूँ सौतन के पास ना जाया कर राजा
सजी – सजाई सेज, अब गरल लगता है.
अच्छा है की मैं ही तेरी हाँ बनी
उस कलमुही का ह्रदय, बस तेरा बटुआ जानता है.
This poem is dedicated to Panjabi poet Shiv Kumar Batalvi.
परमीत सिंह धुरंधर
दो नैना तेरे काले – काले, चल रहे हैं जमाना
तू घूँघट जो उठा दे तो, दहक जाए ये जमाना।
कमर तेरी बलखाये, जिसका सागर है दीवाना
तू घूँघट जो उठा दे तो, बहक जाय ये जमाना।
अंग – अंग पे जैसे बहार आयी है
कमर हुई है वीणा, नयन कतार हुई है.
ये धुप है या छावं, तप रहा है ये जमाना
तू घूँघट जो उठा दे तो, चालक जाए ये पैमाना।
परमीत सिंह धुरंधर
चाँद बनो तुम तो रात का फिर नशा भी हो जाए
ख्वाब बनो तुम तो धड़कनों को मुकाम मिल जाए.
कब तक रखोगे यूँ हमसे घूँघट मुख पे रानी
ये घूँघट हेट तो अधरों का मिलन भी हो जाय.
परमीत सिंह धुरंधर
यूँ चहका ना कर लाडो
नजर में शिकारी के आ जायेगी।
अभी तो एक कच्ची कलि है तू
बिना खिले ही मुरझा जायेगी।
यूँ निकला ना कर बाहर लाडो
नजर में गिद्धों के आ जायेगी।
अभी तो मासूम है बड़ी तू
बिन उड़े ही पिंजरे में आ जायेगी।
तेरा रंग है सच्चा मेरी लाडो
पर अब ये बस्ती सच्चा नहीं।
यूँ किसी से ना मिला कर लाडो
नजर में बाजों के आ जायेगी।
अभी पंख तेरे कमजोर हैं
पंजे में दुश्मनों के आ जायेगी।
परमीत सिंह धुरंधर
मैं खामोश हूँ, दिल बेचैन रहता है
गुनाह मेरे दिल का, मेरा रब जानता है.
हर दिल में डर है, राज महफूज है या नहीं
इस दौर में हर कोई, शक से बीमार लगता है.
सब कहते हैं उन्हें दौलत नहीं, सच्चा प्यार चाहिए
जिनकी रातों के लिए, यहाँ बाजार लगता है.
परमीत सिंह धुरंधर
You will be my heart baby
You will be my heart.
I will sing a song for you
And you will dance.
Let the DJ put the music
I will hold you in my arms.
You will be my heart baby
You will be my heart.
आँखों से पिलाना छोड़
बाहों में आजा मेरी जान.
सारी रात का इश्क़ होगा
और तेरी – मेरी साँसों का घमासान।
You will be my heart baby
You will be my heart.
तू बोल, तो ले चलूँ तुझको
आज की night, अपने साथ.
You will be my heart baby
You will be my heart.
परमीत सिंह धुरंधर
पतली कमर पे तीखी नजर लेकर
क्या करोगी रानी?
छमक – छमक के चलती हो
कहाँ बिजली गिराओगी रानी?
प्यासे- प्यासे कब से है हम
अधरों से दो बूंदें कब छलकावोगी रानी?
परमीत सिंह धुरंधर