उसने मोहब्बत में ऐसे दिया सहारा,
नाम किसी का, और दिल लिया हमारा।
पैसों के खेल में मेरी ही हुई पराजय,
पर चरित्र के मैदान में सबको था पछाड़ा।
परमीत सिंह धुरंधर
उसने मोहब्बत में ऐसे दिया सहारा,
नाम किसी का, और दिल लिया हमारा।
पैसों के खेल में मेरी ही हुई पराजय,
पर चरित्र के मैदान में सबको था पछाड़ा।
परमीत सिंह धुरंधर
एक चूहे ने खोद -खोद के,
खोखला पहाड़ कर दिया।
मगर एक चुहिया की आँखों ने,
उसको भी बेचैन कर दिया।
एक कबूतर ने पंख फैला के,
आसमान चुम लिया,
मगर एक मादा कबूतर ने,
उसको भी पंखहीन परवाज कर दिया।
इश्क़ कर तो फिर खुदा की चाह ना कर,
इश्क़ में तो खुदा भी बेबस है।
परमीत सिंह धुरंधर
There is no happy end in love.
Life is like Titanic,
When we need,
It sinks.
Don’t try,
Don’t try,
Let it go.
Let it go,
And give your
Best smiles.
I know my heart,
Wants to hug you.
But lets keep the distance,
Between us.
Love is like Titanic,
Whenever I try,
It sags and gives tears.
Don’t try,
Don’t try,
Let her go.
Let her go,
With her best smiles.
Parmit Singh Dhurandhar
I collect your smiles,
As the function of rnorm,
Lets plot the distribution, baby
Lets plot the distribution,
Whether it is normal,
Or binomial.
The fisher test would tell,
Whether it is love,
Or infatuation.
Parmit SIngh Dhurandhar
Make it hot baby,
Make it hot.
Let be clear once again,
I do not like,
A Barbie doll.
You know,
I love darkness,
When it comes to love.
Lets play the game baby,
Lets play the game.
With only HMM model,
And all your hidden traits.
Parmit Kumar Singh
बाहर बादलों की भीड़ हैं प्रिये,
बरस रहें हैं द्वार पे, वो नित प्रिये।
तुम वहाँ गावं में, हम यहाँ परदेश में,
प्रीत में ये कैसी रीत हैं प्रिये।
लाता हूँ रोज फूलों को, जुल्फों की तेरे याद में,
दीपक भी जलाता हूँ, तेरे मुखड़े की आभा में.
तुम चूल्हा-चौकी पे, हम लम्बी रातों में.
विरहा के ये कैसे गीत हैं प्रिये।
ओठों की लाली हम नहीं चख पाए,
आँखों के काजल हम नहीं सोंख पाए,
ना पतली कमर पे हाथ ही फेर पाए.
तुम सीने में दबाए, हम वक्षों की आस लगाए,
जीवन की ये कैसी पीर है प्रिये।
परमीत सिंह धुरंधर
These lines describe when husband is in city and his wife is in village. They have not spend quality time after marriage as her husband had to go for job. He is missing his wife as it is raining outside. So he is trying to imagine her face and her beauty. This was situation during 1970-2000, not now.
जिंदगी के शौक ने काफिर बना दिया,
मजनू बनने चले थे, ग़ालिब बना दिया।
इस कदर उनके ओठों की तलब हुई,
भरी जवानी में ही शराबी बना दिया।
परमीत सिंह धुरंधर
मौसम को सम्भाल मेरे दोस्त,
ओठों से कुछ ज्यादा ही,
बढ़ रही हैं तेरे नजदीकियां।
थके, हारे, गिरे इस मर्द पे,
ना कर तू ऐसी मेहरबानियाँ।
मैं भी कभी शिकारी था, मगर,
आँखों की रौशनी, अब कुछ धुंधली है,
मांसपेशियां भी कभी – कभी अकड़ जाती है.
तो ना बिछा यूँ मुझपे, रोज – रोज,
शतरंज की बाजियां।
क्योंकि,
दिमाग अब भी वो ही शातिर है,
तो ए दोस्त,
न जगा इसे, यूँ गिरा – गिरा के बिजलियाँ।
परमीत सिंह धुरंधर
जिंदगी के शौक ने काफिर बन दिया,
मजनू बनने चला था, ग़ालिब बना दिया।
हुस्न वालो की शहर में होता है,
चर्चा मेरा एक बेवकूफ के रूप में.
क्यों की मैंने उनको,
उन्हीं का आइना दिखा दिया।
परमीत सिंह धुरंधर
एक है खत्री, और एक आफताब है,
दोनों के आँखों में मेरा ही ख्वाब हैं.
तो कैसे सम्भालूँ जोबन रसिया,
Crassa के मुंह से भी टपकsता लार है.
एक ही बार में टूट जाते है,
चोली के सारे बटन मेरे.
ऐसा इनकी आँखों का कमाल है.
तो कैसे सम्भालूँ चुनर रसिया,
जब तीनो बदमाश एक साथ है.
परमीत सिंह धुरंधर