मैं रातों को जलता रहा,
वो दिन भर सुलगती रहीं।
ये प्यार ही तो है जिंदगी,
की हम मिल भी न सके दो घड़ी.
वो मुड़ – मुड़ के देखती रहीं,
मैं हर पल राहें बनता रहा.
ये प्यार ही तो है जिंदगी,
की हम चल भी न सके संग दो घड़ी.
परमीत सिंह धुरंधर
मैं रातों को जलता रहा,
वो दिन भर सुलगती रहीं।
ये प्यार ही तो है जिंदगी,
की हम मिल भी न सके दो घड़ी.
वो मुड़ – मुड़ के देखती रहीं,
मैं हर पल राहें बनता रहा.
ये प्यार ही तो है जिंदगी,
की हम चल भी न सके संग दो घड़ी.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी आँखों का रंग,
लगता है जीवन।
मेरी साँसों का समंदर बनके,
गोरी ले जा हंस के जवानी मेरी।
परमीत सिंह धुरंधर
अक्सर रातों में, मेरे ख़्वाबों में,
एक चाँद आता है, बादलों में.
वो करता है इसारे, जुल्फों को सवारें,
मैं देखता हूँ खुली पलकों से.
बदली के आर से, नैनों के तार से,
धड़कनो को मेरे, वो छू के जाता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.
रोसनी दुनिया की उसके आँखों से ,
चांदनी रातों की उसके आँचल से.
मैं तरपता हूँ, मैं तरसता हूँ,
जब उसका आँचल ढलक जाता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.
सोया नहीं मैं कितनी रातों से,
जागता हूँ यूँ ही उसकी राहों में.
सिमट आती हैं सारी हवाएँ,
चुने को उसके बदन को.
सज – सवर के जब वो निकलता है.
एक चाँद आता है,
एक चाँद आता है.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरे नैना मिलते है जो मेरे नैनों से,
तो पूरी रात जलते हैं ये दीये।
कैसे मैं कह दूँ,
मीठे लगते है मुझे ये दीये।
परमीत सिंह धुरंधर
यूँ ही शाम को,
मिला करो.
ढलती धुप में,
हमसे जरा.
यूँ ही जाम नजर से,
पिलाया करों।
चढ़ती रात में,
हम को जरा.
तुम्हारा जादू ऐसा है,
अब नहीं संभाला जाता है.
यूँ ही थाम लो,
बाहों में अपने।
बढ़ के तुम,
हम को जरा.
कल तक थी शिकायत,
क़द्र नहीं हमें आपके जज्बातों का.
अब है शिकवा की,
कुछ ज्यादा ही ख़याल आ रहा है आपका।
यूँ ही हर मोड़ पे,
शिकायत करों।
मगर हंसकर,
तुम हमसे जरा.
परमीत सिंह धुरंधर
आँखों की किस्मत के क्या कहने,
धुप में भी छावं लगे.
दुप्पट्टा जब सर से ढलक के,
उनके सीने पे ठहरे।
कौन कम्बखत,
जन्नत की सैर चाहता है.
बस हवा का झोंका, एक पल को,
उनका दुप्पट्टा उड़ा दे.
परमीत सिंह धुरंधर
A long twelve-year,
But, still I remember,
Your curly hair.
Your nose,
Your smile,
And,
Eyes full of tears.
A long twelve-year,
But, still I remember,
Your pain,
Your passion,
And,
Your fear.
A long twelve-year,
But still I remember,
Your touch,
Your breath,
And,
Your desire.
A long twelve-year,
But, still I remember,
A knife in your finger.
Cake,
And,
The birthday in November.
But, unable to understand,
How you forgot everything,
In a night, dear .
Parmit Singh Dhurandhar
मत पूछो मालिक,
ईद कैसी रही.
उनके ओठों पे थी सेवइयां,
मेरे सीने में आग जलती रही.
परमीत सिंह धुरंधर
हमने प्रेम में,
इतने तिरस्कार झेलें हैं.
आंसू भी निकलने से,
अब इंकार करते हैं.
चाँद कभी भी,
पलट के अमावस कर दे.
सैकड़ो सितारे भी,
इसके आगे विवस दीखते हैं.
जमाने का क्या है?
यहाँ तो सभी, दूसरों के चूल्हे,
की आग पे सेंकते हैं.
हम इस कदर,
दिल को जला चुके हैं,
हर शहर में, हुस्नवालों से पहले,
हम मयखाना ढूंढते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
शहंशाहों के तख़्त बदल गए,
पर अंदाज नहीं बदले।
तुम्हारी जवानी ढल गयी होगी,
मगर हमारे इरादे नहीं बदले।
भीड़ से फौज नहीं बनती,
हमने आज तक,
म्यान में तलवार नहीं बदले।
सुनता हूँ रोज की,
तुम्हारी जुल्फें सफ़ेद हो गयी हैं।
मगर हमने आज तक,
वो तस्वीर नहीं बदले।
कभी मिलना,
तो देख लेना खुद ही,
घांस की रोटी खाकर,
जमीन पर सो कर भी.
इस राजपूत ने, आज तक,
आज भी वो चाहत नहीं बदले।
परमीत सिंह धुरंधर