इश्क़ का गाँठ


मैं बहारों सी आई हूँ,
तू इश्क़ बनके छा जा.
मैं रेशम की धागा सी,
तू उसमे गाँठ बनके पड़ जा.
मैं बलखाऊं, लहराऊं, हवाओं सी,
तू मेरी राहों में पर्वत बनके आजा.
जब शाम ढले, तू ताड़ छेड़े,
मेरी रातों को बादल बनके भिंगो जा.

परमीत सिंह धुरंधर

धनिया से धान भइल बारु


जब से जवान भइल बारु,
धनिया से धान भइल बारु.
चमकअ तारु, चमकावअ तारु,
नाक में नथुनिया डाल के.
लहकअ तारु, लहकावअ तारु,
योवन पे चुनरी डाल के.
पूरा खिल के खलिहान भइल बारु,
जब से जवान भइल बारुं,
धनिया से धान भइल बारु.
रूप ताहर नयका,
रंग ताहर नयका.
सोना के भाव भइल बारु,
जब से जवान भइल बारुं,
धनिया से धान भइल बारु.
महकअ तारु, महकावअ तारु,
केसिया में गजरा डाल के.
छलकअ तारु, छलकावअ तारु,
अँखियाँ में कजरा डाल के.
सरसो से महुआ भइल बारु,
जब से जवान भइल बारु,
धनिया से धान भइल बारु.
लहर उठा दअ ,
जहर पिला दअ.
अंग-अंग से गुलाब भइल बारु,
जब से जवान भइल बारु,
धनिया से धान भइल बारु.

परमीत सिंह धुरंधर

रातों का दाग


खूबसूरत जिस्म पे,
अब भी है,
रातों का दाग.
खिड़कियाँ,
बंद ही रहने दो.
मुझे उजालों की नहीं,
अब भी,
इन ओठों की हैं प्यास।
ऐसा क्या है,
इन दिन- दोपहर में,
जो तुम मुझसे दूर भागती हो.
मत डालो,
ये उतारी हुई चुनर,
मुझे अब भी हैं,
इन अंगों की तलाश।

परमीत सिंह धुरंधर

चुम्बन : दांतों का खेल


वो एक कातिलाना,
अंदाज रखती हैं,
मेरे लहू की,
एक प्यास रखती हैं.
लोग कहते हैं जिसे मोहब्बत,
उस शम्रो-हया के पीछे जाने,
वो क्या -क्या ख़्वाब रखती हैं.
वो टकराती हैं राहों में,
अपना दुप्पट्टा लहरा के.
हम अपनी नजरे झुका के चलें,
तो भी शरीफ नहीं।
अपनी शराफत के पीछे जाने,
वो कैसे-कैसे नकाब रखती हैं.
दांतों का खेल है,
चुम्बन मोहब्बत में,
तभी तो बुड्ढों पे वो,
खिलखिला के हंसती हैं.
हम जैसे जवानों की जल रही है,
हसरते कुवारीं।
और ओठों की अपने ही दाँतो से,
वो दबा के रखती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Kissing your partner has no meaning if your teeth are not involved in that.

कुत्ता और चाँद


कुत्ते दौड़ते हुए गलियों में,
उनका रूप चुराने को.
अम्बर पे चाँद हंस रहा,
देख अपने दीवानों को.
कुत्तों की किस्मत में नहीं,
चाँद से अपने मिल पाना।
ना चाँद के भाग्य में है,
इन कुत्तों जैसा कोई दीवाना।

परमीत सिंह धुरंधर

जुदाई


वो शाम सी ढली,
और खो गयी,
रात के अंधेरो में,
की हम फिर मिल न सके.
उसे जिद्द था मुझसे दूर जाने की,
मुझे गुरुर था उसके निगाहों की,
उसकी मोहब्बत में,
बनकर तारा यूँ मैं टूटा,
की फिर कभी ये जुदाई मिट न सकी.

परमीत सिंह धुरंधर

चाँद


कहते हैं की,
चाँद भी कभी-कभी मुश्किलों में आ जाता है,
जब आँगन में उसके अमावस छा जाता हैं.
बादलों के बीच उड़ने वाला,
तारों के बीच में मुस्कराने वाला,
उस एक रात, कहीं जाके छुप जाता हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

The girl with the newspaper


The girl with the newspaper,
took my heart forever.
In the moving train,
first time,
I felt the heart-pain.
That night, I dreamed a lot,
because, she was so hot.
With black eyes,
and long hair,
took my heart forever.
The girl with the newspaper,
took my heart forever.

Parmit Singh Dhurandhar

किस्मते-दर्जी


दिल कब का टूट कर, समुन्दर में बह गया,
वो अब तक दरिया में प्यार ढूंढती हैं.
इश्क़ का मेरा चूल्हा, जल कर कब का बुझ गया,
और वो अब तक सिलवट पे सरसो पिसती हैं.
निगाहों में उनके हैं कितने ही परदे,
कोई हाय, शर्म, लज्जा तो कोई मोहब्बत कहता हैं,
जब भी देखता हूँ इन पर्दों के अंदर,
बस सोना, चांदी और पैसों का चमक दीखता हैं.
कौन कहता है की मोहब्बत दिलवालो का खेल हैं,
आज भी उनका दुपट्टा कहीं और,
तो कमीज, कहीं और ही सिलता है.

परमीत सिंह धुरंधर

कभी फिर


तुम ऐसे मिले मुझसे,
की नजरे हटी न कभी फिर.
तन्हा-तन्हा सा रहता हूँ,
नींदे आयीं न कभी फिर.
अच्छा है की हम्मे ये दूरी है,
मेरी भी मज़बूरी है.
तुम जो अपने पास होते,
हम सो न पाते कभी फिर.

परमीत सिंह धुरंधर