लाल साड़ी


लाल साड़ी में आपको देख के,
दिल तो बईमान हो गया हैं.
हम ही अभी तक,
इस ईमान को थामे बैठे हैं.
ये जानते हुए की आप,
किसी और की हो रही हो,
जाने क्यों आपका आँचल पकड़े बैठे हैं.
जाने किस्मत में क्या लिखा है,
और आप कितना समझोगी,
मगर हर रात,
आपके लिए दिया बुझा के बैठे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


तेरी मोहब्बत का क्या सिला दें,
हम निगाहों से पीते हैं, तुम चेहरे पे हिजाब रखते हो.

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न


शरारत हुई है तो,
गुस्ताखी भी होगी।
हुस्न अगर पास है,
तो इतना न इठला,
निश्चित ही,
क़यामत भी होगी।

परमीत सिंह धुरंधर

यकीन


मुझे पीने का शौक हैं,
तू पिलाने की शौक़ीन बन.
छोड़ ये वफ़ा, बेवफाई की बातें,
तू एक बार तो,
इन बादलों की जमीन बन.
मुझे बरस कर,
मिट जाने का डर नहीं।
तुझे भींग कर,
लहलहाने में भय है.
कब तक टकटकी लगाओगे,
खुदा के दर पे मदद की,
कभी तो अपने योवन का यकीन बन.

परमीत सिंह धुरंधर

खूबसूरत – मोड़


खूबसूरत से एक मोड़ पे,
तन्हा सा मैं बैठा था.
तू गली में जब निकल कर आई,
किस्तों में दिल टुटा था.
नजरे झुका कर, तू चल रही थी,
अपने आँचल में सब कुछ छुपाएँ,
तेरी लहराती जुल्फों की,
हर लट से मेरा दिल उलझा था.

परमीत सिंह धुरंधर

भांग


योवन के धुप में,
तू ऐसे है खिल गयी.
जैसे अमीरों के बस्ती में,
गरीबों के चादर उड़ी.
तेरे अंगों पे ऐसे बहकने लगे,
मोहब्बत के परवाने।
जैसे छोटी सी बस्ती में,
होली में भांग हो बटी.

परमीत सिंह धुरंधर

मेवाड़ की गोरी


तेरी ऐसी नजरिया है काली, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी नजरिया है डाली, राणा भी मस्ती में बहक गए.
सोने सा योवन तू लेके, चलती है जो पनघट पे,
भींगे-भींगे तेरे तन से, सुलगता है सबका तन-मन रे.
तूने ऐसी पहनी रे चोली, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी सिलाई रे चोली, राणा भी मस्ती में आ गए.
झुकी-झुकी नजरो से जो तू देखे एक बार,
मेवाड़ में बहने लगती है, मस्त-वयार।
तूने ऐसी है पेंच लड़ाई, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी है ढील बढ़ाई, राणा भी मस्ती में बहक गए.
खिला-खिला तेरा अंग, छेड़े मन में मेरे मृदंग,
जो भी देखे तुझे, चाहे तेरा ही संग.
तूने ऐसी है आँचल उड़ाई, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी है ली अंगराई, राणा भी मस्ती में आ गए.

परमीत सिंह धुरंधर

चाल


जिसकी एक चाल पे दुनिया मिट गयी,
जाने कैसे हमने अपनी साँसों को संभाला है.

परमीत सिंह धुरंधर

संयम


धीरे-धीरे विचलित हो रहा है मन, रूप तेरा देख के,
संयम कैसे रखूं, बता जरा अपने नयनन से.
कोई सजा, मौत की भी परवाह नहीं,
एक बार मिल जाए अधर मेरे तेरे अधरों से.

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न


आँखों में माया रखती हैं,
ह्रदय में छलावा रखती हैं.
तुम कहते हो प्रेम उसे,
वो तो दिखावा करती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर