तनी कमर नपवा जा


तनी घूँघट में छुप के गोरी,
दालान में आजा.
भरल दुपहरिया में ठंडा,
दही-चूरा खिला जा.
अबकी के कटनी में,
नया कमरघानी बनवा देम.
तनी अंचरा गिरा के गोरी,
कमर नपवा जा.
छोड़ अ अब कहल,
बाबुल के प्रेम के कथा।
तनी फुरसत में,
तोता -मैना के किस्सा वाच जा.
अब की के दवनी में,
नायका लहंगा दिलवा देम.
तनी अंचरा गिरा के गोरी,
कमर नपवा जा.
कब तक माई-भाई के चिंता में,
जोबन के बांध बू.
कभी फुरसत में,
हमसे तेल लगवा जा.
अबकी के फगुवा में,
नायका चोली सिलवा देम.
तनी अंगिया हटा के,
जोबन नपवा जा.
तनी घूँघट में छुप के गोरी,
दालान में आजा.
भरल दुपहरिया में ठंडा,
दही-चूरा खिला जा.
अबकी के कटनी में,
नया कमरघानी बनवा देम.
तनी अंचरा गिरा के गोरी,
कमर नपवा जा.

 

परमीत सिंह धुरंधर

गोरी के जवनियाँ


पलकवाँ ना गिरे लोग के, देखी हलकवाँ सुखी जाला l
गोरी के जवनियाँ के, सारा जिला में बा हाला l
लगावेले कजरवाँ जब, दिन में रात होइ जाला l
चँदवो मलिन होके, घाटा में छिपी जाला l
केशिया बिखरावे जब, सावन के घटा छा जाला l
चूमेला गोरी के अचरियाँ के, धरती पे आकाश आई जाला l
पतली कमरिया से जब, जोबना के भार ना सहाला l
तब पनियाँ गगरियाँ के, देहिया में छलक छलक जाला l
सायवाँ उठवलस जब, हिलेला मलमलिया के नाला l
जवनका के का कहे के, बुढ़वों में जोश भर जाला l
सरवाँ घर घरे गगरी जब, नितंबवाँ वीणा के तम्बू बुझाला l
ऊपर से झुलावे चोटिया के, त वीणा में तार बन जाला l
मेनका के रूप पे जब, जैसे विश्वामित्र के तपस्या टूटी जाला l
वैसे दिल धुरंधर सिंह के, गोरी के चोली में फँस जाला l

These lines were written by my father Dhurandhar Singh.

चुनर सरक जाए


अंखिया -से – अंखिया ऐसे मिलाव गोरी,
ताहर चुनर सरक जाए, और उड़ जाए मेरी नींद गोरी।
देहिया – के – देहिया के पास, अतना लाव गोरी,
की ताहर कंगन खनक उठे, और हमार दिल गोरी।

 

परमीत सिंह धुरंधर

सैयां खोले ला चोलिया हमार


सैयां खोले ला चोलिया हमार,
गुलेलिया मार-मार के.
सैयां खूबे ने खिलाड़ी बा हमार,
चूमे ला गालिया, बात – बात पे.
सखी, का कहीं, कइसन बारन,
सखी, का कहीं, का -का करेलन।
सैयां ढूंढे ला ढोढिया हमार,
अंखिया पे रुमाल बाँध के.
सैयां खूबे ने खिलाड़ी बा हमार,
चूमे ला गालिया, बात – बात पे.
घडी – घडी पास आके,
पूछे कब होइ रात,
दुनिया के अनाड़ी,
सेजिया पे बाटे नु चालाक,
सैया काटे ला दही सजाव,
अँखियाँ में आँख डाल के।
सैयां खूबे ने खिलाड़ी बा हमार,
चूमे ला गालिया, बात – बात पे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो


माई कहले बारी,
तहसे हम बात ना करीं,
की तू बड़ा बदनाम बड़ा हो.
हमार माई कहले बारी,
तहके घर ले चलीं,
की ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो.
चलअ, हटअ पीछे, हमके मत छेडअ हमके,
बाबुल से पहले मांगअ ई हाथ हो.
देखअ ताहरा खातिर कंगन ले आइल बानी,
पाहिले पहनाएम ई ताहरा हाथ हो.
देखअ हाथे तक रहअ, पहुँचा मत धरअ,
हमार धड़कअता अब दिल हो.
त छोड़अ माई – बाबुल के चिंता,
अब हो जाएगअ सार खेल हो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

चोली तहार अब दू गो हाथ मांग अ ता


धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
ऐसे मत बाँध अ अंचरा के कमर से,
ढोरी पे तहार कौआ दावँ मार अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
भीगल तहार चोली में बाढ़ आइल बा,
छोटी सी पोखरा में ज्वार आइल बा.
ऐसे मत खोंस अ साया ऊपर करके,
कछुआ भी देख अ आँख मार अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
मत जलाव अ अपना जवानी के तू,
ऐसे दिन-रात एक प्राण के खातिर।
कभी सुस्ता भी ल बथानी में हमारा,
की खटिया हमार अब दू गो देह मांग अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
लचकत तहार कमरिया पगडण्डी में,
अरे मुखिया के घर तक भूचाल मार अ ता.
कब तक रख बू बाँध – बाँध के,
की चोली तहार अब दू गो हाथ मांग अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
आव अ बैठ अ पास तनी,
तहार रूप अब हमार साथ मांग अ ता.
रखें तहारा के आपन बनाके,
तहार अंग – अंग अब हल्दी के रंग मांग अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू


कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
अइसन बा ताहर नजरिया, की चकाचक लागेलू।
कजरा पे तहरा बहकल सारा छपरा,
आ लहंगा से तहरा लहकता देवरिया।
जब करेलू टाइट चोली, मीठा ख़्वाब लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
हिरणी सी चलके, मोह लेलु मोहनिया,
देख गदराइल जवानी, जाम भइल मलमलिया।
जब उड़ावेलु ओढ़नी, जिला टॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।

परमीत सिंह धुरंधर

I wrote this after listening this video