जोबना


गोरी तहरे जोबना के भार से आइल बा देल्ली में भूचाल रे,

गोरी तहरे नजरिया के कटार से तुतल बा दियारा के बाँध रे परमित.

 

नथुनिया दिलाई ना


तानी दूर-दूर से ए बालम धुरंधर जी,
नयनन में प्यार जगाई ना,
खेत कहीं नइखे भागल जात,
कहियो आँगन में खाट बिछाई ना.
कब तक बहेम खुदे बैल नियर,
कभी हमके भी छपरा घुमाई ना.
चूल्हा-काठी करत, हमार कमर टूट गइल,
गेहूं-धान बोआत, राउर उम्र हो गइल,
कब तक करेम इह दुनियादारी,
कभी गंगा में भी संगे नहाईं ना.
अरे बबलू बो, गुड्डू बो के, देख के जियरा जले,
एगो बालम के कमाई पे, रोजे सजाव दही कटे,
दौलत बचा के का होइ,
कभी एगो नथुनिया, हमें दिलाई ना.

दामाद


चढ़ के अइलन सूरज माथा पे,
अब तअ उठीं न हमार सैयां।
कब तक दही पे ई छाली जमीं,
कभी तअ चखी मठ्ठा-छाज सैयां।
सबके धान के बिया गिर गइल,
तनी सीखी न जाए के बथान सैयां।
रतिया में करेनी सब आपने मनमानी,
दिन में तअ तनी करी दूसर काम सैयां।
जाने बाबू जी कौन लक्षण देखनी,
की बाँध देनी हमारा साथ सैयां।
देखे में तअ अतना सीधा बानी,
पर बात-बात में फोड़े नी कपार सैयां।
रोजुवे नु माई पूछअ तारी,
अब बताई, बोली कौन बात सैयां।
गंगा नहइली, कतना पियरी चढ़ाइली,
तब जा के मिलल इह परमीत दामाद सैयां।

त्रिया-चरित्र


घर दुआर छोड़ के,
हो गईलन सन्यासी,
फ़लेनवा के नाती हो,
फ़लेनवा के नाती।
सुनलेरनी उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
बड़ों-बड़ों के बीच में,
करस तहार बखान हों,
देखअ उनकर बिकअता,
खेत आ खलिआन हों।
दबी जुबान में हर कोई कहे,
की उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
छीन के आपने,
मेहरारून के पैजनियाँ,
बाँध देहलन तहके,
बनइलन दुल्हनियां।
की ओइसन,
राज कुमार से,
एगो सुकुमार से,
तुहुँ मंगवैलू,
भीख के दाना हो।
सुनलेरनी उनकर,
भीरल रहल टंका,
तहरे से रानी हो,
तहरे से रानी।
कतना लिखान भइल,
कतना पुराण भइल,
कोई न समझल,
ई त्रिया-चरित्र हो।
की कहतारन बाबू,
ईह परमीत सिंह,
की हम न करेम,
तहसे रानी ई प्रीत हो।
सुनलेरनी ताहर,
भीरल रहल टंका,
उनकरे से रानी हो,
उनकरे से रानी।

होली : मायका और ससुरा में


सोलहगो होली खेलनी मायका में,
मायका में,
पर अंग पे रंग चढ़ल ससुरा में.
पाहिले त आँखवा में आंसू आइल,
न अब माई-बहिनी भेटाई रे,
पर रोम-रोम पुलकित हो गइल,
जब नंदी मरलख पिचकारी से.
पिचकारी से.
गावं-गावं होली खेलनी मायका में,
मायका में,
पर अंग पे रंग चढ़ल ससुरा में.
दोपहर भइल फिर साँझ भइल,
सुने न कोई हमर गारी रे,
अरे चूड़ी टुटल, कंगन टुटल,
जब धइलख देवर अँकवारी में.
नाच-नाच होली खेलनी मायका में,
मायका में,
पर अंग पे रंग चढ़ल ससुरा में, परमीत

जवानी के दांव


जब से जवान भइल बारू,
गुलशन के आम भइल बारू।
ललचअ तारन केजरीवाल भी,
आ बुढऊ अन्ना के,
जी के जंजाल भइल बारू।
शीला के कईलु तू पानी-पानी,
ये ही उम्र में ममता के,
जी के घाव भइल बारू।
मोदी भी बारन धोती खोंट के,
बाबा राहुल के,
जवानी के दांव भइल बारू।

दूल्हा चली: बोका आ लोला


ए माई हो, बाबुल से कह द,
कर देस हमर बिदाई हो,
ए माई हो.
दूल्हा चली, कौनों बोका आ लोला,
पर मत करिहन, कौनो केजरीवाल,
संग हमर सगाई हो.
ए माई हो.
अरे कहे हो बबुनी, बोल अइसन बोलअ तारु,
कतना छाईल बा महंगाई हो,
तबे तो छेडले बा केजरी लड़ाई हो,
दुनिया करता कतना देखअ बड़ाई हो,
कइसन भाग्य होई कि तहार,
कि बंबू तू ओकर लुगाई हो.
ए माई हो, ताहर उम्र गइल निकल,
ताहरा ना नु ई बुझाई हो,
कहिवो पलट जाई, कहिवो सुलट जाई,
हद त तब होई, जब कही उ हमके पराई,
अ पराई के कही आपन लुगाई हो.
ए माई हो.
अरे खाई हमार, और दुसरा के,
आँगन में बिछाई आपन चारपाई हो.
ए माई हो, बाबुल से कह द,
कर देस हमर बिदाई हो,
ए माई हो.
दूल्हा चली, कौनों बोका आ लोला,
पर मत करिहन, कौनो केजरीवाल,
संग हमर सगाई हो.