तालाब पे


गोरी देहात के,
आटा जाँत के,
छूटे न मुह से.
तनी दूर रही राजा जी,
बैर अभी ई टूटी ना.
बोली हजाम के,
घोड़ी लगाम पे,
रोकलो कोई से, रुकी ना.
एक बार नहा ल,
तालाब पे गोरी।
मौसम फिर अइसन, आई ना.

(She is not believing his love. He says that you would miss this love in your old age.)

परमीत सिंह धुरंधर

झुमका ला दीं


झुमका ला दीं, हँसुली ला दीं,
तनी बोलअ ना रानी, हंस के.
रोटी बनैले बानी,
तहरे खातिर घी घस के.
दिल्ली घुमा दीं, बॉम्बे घुमा दीं,
तनी बैठअ ना रानी, सट के.
छोड़ के बथान, तहरे खातिर,
खटिया डल्ले बानी आज घर में.
पैर दबा दीं, हाथ दबा दीं,
तनी आवअ ना रानी, सज के.
मूड बनैले बानी तहरा खातिर,
आज रम से.

परमीत सिंह धुरंधर

नथुनिया


रोज करेलअ,
छपरा, सीवान, मलमलिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।
खूब बोलेलअ,
चाँद, चंदा, चंदनिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।
रोज काटेलअ,
गेहूं, धान, धनिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।
सबके पढ़ेलअ,
कथा, कहानी, चिठिया।
सैयां कहिया आई,
हो नथुनिया।
तानी सबर धरअ न,
साथे ले आइम पैजनिया।

परमीत सिंह धुरंधर

बीमार – सास


पायल छनकअता रात- रात भर,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
टूट गइल शर्म के सारा दीवार,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
मायका से आईल बा चिठ्ठी,
घरे बुलावाव तारी माई।
लिखदअ बालम तनी ई जवाब,
बीमार बारी सास हमार।
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
पायल छनकअता रात- रात भर,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
टूट गइल शर्म के सारा दीवार,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।

परमीत सिंह धुरंधर

चार-सहेलिया


राते आइलन हमर बलमुआ, चाँद पे तेल लगा के,
अंग-अंग हिला गइलन, हमके भांग पिला के.
राते आइलन हमर बलमुआ, अंखिया के ऐनक तुड़ा के,
भौजी के झूला गइलन, मुखड़ा हमार बता के.
राते आइलन हमर बलमुआ, दारु पे दारु चढ़ा के,
सारा माल लूट लेहलन, पड़ोसी के रसोई में जाके.
राते आइलन हमर बलमुआ, मुह में पान चबा के,
सउँसे देहिया लाल कइलन, हमके गुलाब बता के.

परमीत सिंह धुरंधर

दुल्हन धमाल


जब से जवान भइल बारुं,
दुल्हन धमाल भइल बारु।
झूललतारु, खेललतारु,
ससुरा में झुलुआ डाल के.
ललुआ भइल, भलुआ भइल,
पर बारु अभिवो कमाल के.
निकललतारु, चललतारु,
घुंघटा तू डाल के.
दामाद उतरल, बहू उतरल,
पर बारु अभी वो सोलह-साल के.

परमीत सिंह धुरंधर

निराला सैयां


हमर सैयां बारन बड़ा निराला,
जतना खालन मीठा ओतने तीखा।

परमीत सिंह धुरंधर

सैयां के हाल


सुबह होते कहलन सैयां,
अंखिया में काजल लगावेला।
रतिया में सैयां खुदे,
सारा काजल चुरा लेहलन।
का कहीं सखी,
आपन सैयां के हाल,
दिनवा में पहनाके सब सोना-चाँदी,
रतिया में देहिया से झार लेहलन।

परमीत सिंह धुरंधर

थाती


रतिया तहरे से हाथ लड़ा के,
चूड़ी-कंगन, हँसुली हेरइली।
अइसन जीत के का करीं,
जब अकेले हम हीं आपन थाती लुटाइली।

परमीत सिंह धुरंधर

राजा जी


सैयां तहरे जवानी के किस्सा रहल,
जो कचहरी में चलल रहल.
पंच-प्रमुख भी का करियन तहरा के,
उनकरो घरे त ताहर काँटा फसल रहल.
बड़ा कइलअ तू मनमानी राजा जी,
गाउँवा में सबके बनइलअ तू नानी राजा जी.
छोड़अ अब ई सब धंधा हमरो पर धयान द राजा जी,
अब संभालअ तू आपन घर और दुआर राजा जी.

परमीत सिंह धुरंधर