सत्ता बाँट रही हमको


कितने लहू बहाकर हम लाये थे आज़ादी
सत्ता बाँट रही हमको, जनता भूल रही हैं कुर्बानी।

अरे सबने खाई थी गोली, मिलकर सबने खाई थी लाठी
सत्ता फिर क्यों पूछ रही है हमसे अब हमारी जाति।
सत्ता बाँट रही है हमको, अब पूछ-पूछ के जाति।

गांधी -नेहरू तो जेल में थे हम सड़कों पे खा रहे थे लाठी
सह रहे थे घात-साजिश, मांग रहे थे हक़-रोटी।
सत्ता बाँट रही है हमको, अब पूछ-पूछ के जाति।

ना होते हाँ जयप्रकाश, तो कब की खुल जाती ये धोती
संविधान के पन्नों की फिर हो गयी होती होली।
सत्ता बाँट रही है हमको, अब पूछ-पूछ के जाति।

लड़े थे बिरसा लिए हाथों में अपने हाँ कुल्हाड़ी
फिर गांधी-नेहरू को ताज मिला, मिली हमें क्यों गुमनामी।
सत्ता बाँट रही है हमको, अब पूछ-पूछ के जाति।

राजेंद्र बाबू ने खाई थी लाठी, चंद्रशेखर ने गोली
गिरे थे लाला-लाजपत राय, तब कहाँ थी अहिंषक-टोली?
सत्ता बाँट रही है हमको, अब पूछ-पूछ के जाति।

पहले उनको अलग बता के बाँट गए जो थाली
अब कहते हैं नहीं मिलेगी खाने को भी दो रोटी।
सत्ता बाँट रही है हमको, अब पूछ-पूछ के जाति।

हमारा कोयला सबको बांटा, पूरब-पश्चिम, उत्तर -दक्षिण
फिर क्यों बिहारी को मिलती है हर जगह हाँ गाली।
सत्ता बाँट रही है हमको, अब पूछ-पूछ के जाति।

कितने लहू बहाकर हम लाये थे आज़ादी
सत्ता बाँट रही हमको, जनता भूल रही हैं कुर्बानी।

RSD