जवान भैसें


काली-काली मेरी भैसें,
हैं इतना जवान।
छोड़ दूँ तो लूट लेंगी,
रात भर में गावं।
खूब खिलता हूँ,
तेल पिलाता हूँ।
रखता हूँ इनका,
कितना धयान।
काली-काली मेरी भैसें,
हैं इतना जवान।
सारे हैं दीवाने मेरी भैस के,
पंच, प्रमुख से पहलवान।
सभी है इसकी आँखों के कायल,
दोस्त, दुश्मन से अनजान।
काली-काली मेरी भैसें,
हैं इतना जवान।

परमीत सिंह धुरंधर

ये बैल नहीं


ये बैल नहीं,
ये बैल नहीं,
ये बैल नहीं,
मेरे जवानी का,
दम्भ हैं.
मेरी आँखों की,
ज्योति,
ह्रदय की धड़कन,
और मेरे मुख का,
तेज हैं.
इनके घुंघरू से,
उठती है सीने में,
मेरे ज्वाला।
मेरे रातो का,
ख़्वाब,
दिल का,
अरमान,
और मेरी जवानी का,
अहंकार हैं.
झूमते हैं,
बहते हैं,
सींगो को लड़ा के.
मलते हैं,
दलते हैं,
उछाल -उछाल के.
मेरे खेतों का,
बहार,
मेरे आँगन का,
श्रृंगार,
और मेरे जीवन का
त्यौहार हैं.

परमीत सिंह धुरंधर 

मेरे बैल


मेरे बैलों ने आज फिर से,
अपनी ताकत दिखाई।
देख के हरियाली,
सावन बरसने चली आई.
जब आस मेरी टूटती है,
तो ये झूम – झूम के बहते हैं.
जब सांस मेरी थकती है,
रुक -रुक के ये बहते हैं.
मेरे बैलों ने आज फिर से,
अपनी मोहब्बत दिखाई।
देख के मेरे तन पे पसीना,
वो आँचल लिए दौड़ी आई.

परमीत सिंह धुरंधर 

दुल्हन


जो दर्पण को देख कर शर्मा जाए,
ए पिता ऐसी ही दुल्हन चाहिए।
जो झुकी पलकों से भी दिल को छू जाए,
ए पिता ऐसी ही दुल्हन चाहिए।
जब लौटूं मैं हल लिए काँधे पे,
दिनभर का थका हारा,
तो वो मंद – मंद मुस्करा कर,
अभिनन्दन करे दरवाजे पे,
ए पिता ऐसी ही दुल्हन चाहिए।
जो काजल भी लगाये आँखों में,
मेरी आँखों में आँखे डाल कर.
जो चूड़ी भी पहने तो,
मेरी बाहों में बाहें डाल के,
ए पिता ऐसी ही दुल्हन चाहिए।
जो मेरे ठन्डे चावल के थाली पे भी,
हौले-हौले पंखा बैठ के डुलाये,
ए पिता ऐसी ही दुल्हन चाहिए।

परमीत सिंह धुरंधर

बैलों और भैंस म…


बैलों और भैंस में येही अंतर है कि भैंस घांस खुद चर लेती है और बैल को काट के, खल्ली मिला के खिलाना होता है, परमीत.

कुछ बैल सिर्फ म…


कुछ बैल सिर्फ मेलों में सजते है और वो बस नाद पे ही भातें हैं, और घर में दहेज़ लाने का काम करते है. वो कभी ना तो खेत में ही सज पाते है न ही खलिहान में. अब ये तो आप कि जावानी पे है कि आप कैसा बैल खरीदते हो, परमीत.

सर्वश्रेष्ठ-रिश्ते


मेरे बैलों कि जोड़ी बड़ी अनमोल है,
एक सीधा तो एक मुहजोड़ है.
बहते है दिन भर पछुआ में,
अरे ये तो बड़े बेजोड़ है.
देख के हल मेरे काँधे पे,
उछलने लगते है ये नाद पे.
अपने सींगों,
पे उखाड़ दे पहाड़ को,
ताकत में ये बेमिशाल हैं.
बहते हैं खेत में झूम -झूम के,
लौटते है घर को,
मिटटी उछाल-उछाल के,
मेरी जवानी के,
ये रिश्ते सर्वश्रेष्ठ हैं परमीत

गड़ासा प्यार में


लिए गड़ासा चल पड़ा हूँ प्यार में,
आज काट के लाऊंगा पूरी घांस रे,
फिर खाना मस्ती में मेरे बैलों,
लगाऊंगा हरियाली जब तुम्हारे नाद में.
इस गावं में या उस गावं में,
चाहे गुमेजी से या चंवर से,
पर लाऊंगा परमीत आज घांस मेरे बैलों,
फिर खाना मुँह डूबा के नाद में