वो वक्त नहीं


तुम मेरे लिए क्या हो तुम्हे मालुम नहीं
और मैं तुम्हे बता दूँ, रहा अब वो वक्त नहीं।

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घनी रात


उनके मिलने के पहले घनी रात थी
उनके जाने के बाद एक चिराग है.

इल्जाम


तेरी महफ़िल में तेरा इंतज़ार कर रहें हैं
कैसी जुदाई है खुद को ही इल्जाम दे रहें हैं.

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मिलन


भीड़ में भी तन्हाई का सफर होता हैं
बिना मिले जिस्म के भी मिलन होता है.

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दर्द


किसी ने दाग से पूछा इश्क़ में दर्द को कैसे पालते हैं
दाग ने कहा, आवो, चलो Crassa से मिलते हैं.
हुश्न और इश्क़ पे तो सबने लिखा है, मीर से ग़ालिब तक
मगर आज के दौर में वो कलम हम रखते हैं.

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चालक अप्सरा


तुम शहर की सबसे चालक अप्सरा हो
दिल चाहता है की तुम्हारा ससुराल बस छपरा हो.
मेरी किस्मत न सही, किसी की तो किस्मत में हो
दिल चाहता है की तुम्हारे करीब कोई अपना हो.
मुश्किल नहीं है रात में दर्द को दबाना
बस दिन में एक बार तेरा दिख जाना हो.

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ऐसी चोट खाई है


मौसम सा हैं वो या मौसम भी उसका मासूक है
कमर पे बादल और केशुवों में हवा महफूज हैं.
रुत बदले भी तो कैसे बिना तेरी अंगराई के
तेरी आँखों में सागर और कमर पे पुरवाई है.
उसका बांधना जुल्फ को यूँ फूलों से
क्या किसी ने कभी ऐसी चोट खाई है.
उड़ती हैं तितलियाँ जिसके दीदार पे
हमने तो उसकी एक ही नजर में होश गवाई है.
टूटे भी इश्क़ में तो गम नहीं,
मीठी मिलन के बाद ही दर्दे-जुदाई है.

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तो मेरा चाँद निकले


वो जो अपनी जुल्फों में हैं रात को समेटे
गेसुओं को खोल दें तो मेरा चाँद निकले।
वो जो हया में अपने बंध के मंद-मंद मुस्करा रहे हैं
ये पर्दा हटा दें तो मेरा चाँद निकले।
हजारों आड़ावों से भरी है उनकी खिली जवानी
जरा जाम छलका दें तो मेरा चाँद निकले।

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दर्द


मेरा दर्द मेरी राहों का काटा बन रहा
प्यास मेरी मंजिल को धुंधला कर रहा.
आँखे इस कदर चौंधियाने लगी हैं
की ये शहर मुझे मेरे गावं से अलग कर रहा.
शोहरत की चाहत पगडंडियों पे चलके
तो मिलती नहीं।
और इनके सड़कों पे भागते मेरे पाँव
और ये थकान, मुझे मेरे ख्वाबों से दूर कर रहा.

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दिल को जलाकर


दिल को जलाकर पिए जा रहे हैं
बचा अब ना कुछ भी, पर जिए जा रहे हैं.
किसको पुकारे, कौन है यहाँ अपना
मुख को हाँ मोड़ें हाँ सभी जा रहे हैं.

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