बनारस


तेरा मुस्कराना, अब वो मुस्कराना न रहा
तेरा दीवाना, अब वो दीवाना न रहा.
तूने रचाई मेहँदी ऐसे किसी के नाम की
बनारस बसने का मेरा इरादा, इरादा न रहा.
हसरतों को ऐसे दफना गयी वो मेरे
फाइलों को चूमने का कोई बहाना न रहा.
उन्हें ही देख के सजाता था वीरान ठिकाने को
उन्हें देखने का वो अब अपना ठिकाना न रहा.

RSD

मेरा न चला


दुनिया मेरी, सिक्के मेरे, कुछ भी मेरा न चला
वो कभी फिर ना मिली, कुछ भी फिर न मिला।
तड़पता रहा उम्र भर मैं, दर्द ही ऐसा लिया
दवा कोई, दुआ कोई, कुछ भी असर ना मिला।

RSD

जान, जानू, दुनिया बना गयी


हुस्न ढला, तो वो घर बसा गयी
दिल टुटा तो मुझे अक्ल आ गयी.
ना रहा भेद जरा भी ख़ुशी और गम में
जिंदगी ऐसे-ऐसे रंग दिखा गयी.
दोस्त कह कर वो ले गए महफ़िल में
वहाँ उनको दुश्मनी याद आ गयी.
वो मिली तो मुझे जान, जानू, दुनिया बना गयी.
सब बना के, शौहर किसी और को बना गयी.

RSD

मंजर


गरीबी और आशिकी ने वो मंजर दिखा दिया
जन्नत सी दुनिया में जहन्नुम दिखा दिया।

RSD

शौहर चुनकर


वो मिली तो मैं ढह गया भरभरा कर
इंतज़ार में जिनके खड़ा था एक दीवार बनकर।
मांगू भी तो खुदा बता उन्हें अपने लिए अब कैसे?
वो लौंटी तो हैं, पर किसी से सात-जन्मों का रिश्ता जोड़कर।
सदमा देकर दिल को वो मुस्कराने लगी हैं खुलकर
लौटीं हैं जब से किसी को अपना शौहर चुनकर।

RSD

जॉन एलीआ


जॉन एलीआ को पढ़ती हैं वो भी
जॉन एलीआ को पढता हूँ मैं भी.
जॉन एलीआ सदमे मैं है
फिर क्यों नहीं हम बने जीवनसाथी?
गंगा की मौजों सी वो भी
गंगा की मौजों सा मैं भी
गंगा खुद सदमे हैं है
फिर क्यों नहीं हुए हम हमराही?
लहू क्षत्राणी का उनमे भी
लहू क्षत्राणी का मुझमे भी
मेवाड़ की धरती सदमे में है
फिर कैसे जुदा हो गयी राहें इनकी।

RSD

घटाव-जोड़


अजब है दुनिया, गजब है दुनिया और दुनिया के लोग
मिलने से पहले किसी से, कर लेते हैं घटाव-जोड़.
रह गया मैं तन्हा, इतना मैं तन्हा, ना मिला कोई मोड़
बस नजरों से ही उसने दिया ऐसा असाध्य-रोग.
सच्ची है मोहब्बत सभी की यहाँ इस जामने में
फिर जाने क्यों दो कदम चलकर ही देते हैं वो छोड़.

RSD

साकी मेरा गैरों में हैं


रात का ख्वाब क्या पालूँ?
जब मेरी नींद उनकी बाहों में हैं.
सुकून कैसे पालूँ खुदा?
जब मेरा महबूब राहों में हैं.
प्यास मिटाऊं भी तो कैसे?
साकी मेरा गैरों में हैं.
वो मिली और कहने लगी
कर रहा कोई इंतज़ार उनका घर पे है.

RSD

दर्द


दर्द मिला तो मुस्कराने लगे
जख्म को कुछ यूँ छुपाने लगे.
बदला मौसम तो सभी बदल गए
हम भी दिखावे को बदलने लगे.
शौक रहा ना उनसे फिर मिलने का
हसरतों को दबा कर यूँ टहलने लगे.

RSD

मुख मोड़े रहते हो


मासूम नजरों से मदहोस करते हो
क्या खूब लगते हो-२.
झुका कर पलकों को अपने करीब रखते हो.
क्या खूब लगते हो-२.
कोई छेड़ ना दे तुमको मेरा नाम लेके हाँ -२
इसलिए हर पल मुख मोड़े रहते हो.
हर रात गुजरती है तेरी मेरी यादों में
इसलिए तो हर सुबह तुम लेट आते हो.
मासूम नजरों से मदहोस करते हो
क्या खूब लगते हो-२.
झुका कर पलकों को अपने करीब रखते हो.
क्या खूब लगते हो-२.

Dedicated to Firoz Khan’s songs

RSD