बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.
गोद में खेलाया है
हांथों से खिलाया है
चुम-चुम के गालों को
रोते से हंसाया है.
आंसू भी निकले तो
भाइयों के आँख हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.
पकड़कर उँगलियों को
स्लेट पे लिखना सिखाया है
भारी हमारे बस्तों को जिसने
कांधों पे अपने उठाया है.
मायके के आँगन पे बस
उनका ही अधिकार हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.
पूर्वज थे एक हमारे जो सब कुछ
अपना मिटटी पे लुटा गए.
ये क्या वक्त आ गया है की
हम अपनी बहनों की भुलाने लगे.
हर तिजोरी, ताले की चाबी
बस अपनी बहनों के हाथ हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.
तोमरों का लहू अब भी जिन्दा है जमीं
जिसका कोई नहीं, उसके हम हैं भाई.
बस राखी के ही दिन नहीं
सालों भर मायके पे अधिकार हो.
बहनों के क़दमों में निसार,
जन्नत, ताज और संसार हो.
बहनों का सम्मान हो
ऐसा एक बिहार हो,
बस शब्दों से बखान नहीं
कर्म भी उस अनुसार हो.
RSD