रात का ख्वाब क्या पालूँ?
जब मेरी नींद उनकी बाहों में हैं.
सुकून कैसे पालूँ खुदा?
जब मेरा महबूब राहों में हैं.
प्यास मिटाऊं भी तो कैसे?
साकी मेरा गैरों में हैं.
वो मिली और कहने लगी
कर रहा कोई इंतज़ार उनका घर पे है.
RSD
रात का ख्वाब क्या पालूँ?
जब मेरी नींद उनकी बाहों में हैं.
सुकून कैसे पालूँ खुदा?
जब मेरा महबूब राहों में हैं.
प्यास मिटाऊं भी तो कैसे?
साकी मेरा गैरों में हैं.
वो मिली और कहने लगी
कर रहा कोई इंतज़ार उनका घर पे है.
RSD
दर्द मिला तो मुस्कराने लगे
जख्म को कुछ यूँ छुपाने लगे.
बदला मौसम तो सभी बदल गए
हम भी दिखावे को बदलने लगे.
शौक रहा ना उनसे फिर मिलने का
हसरतों को दबा कर यूँ टहलने लगे.
RSD
मासूम नजरों से मदहोस करते हो
क्या खूब लगते हो-२.
झुका कर पलकों को अपने करीब रखते हो.
क्या खूब लगते हो-२.
कोई छेड़ ना दे तुमको मेरा नाम लेके हाँ -२
इसलिए हर पल मुख मोड़े रहते हो.
हर रात गुजरती है तेरी मेरी यादों में
इसलिए तो हर सुबह तुम लेट आते हो.
मासूम नजरों से मदहोस करते हो
क्या खूब लगते हो-२.
झुका कर पलकों को अपने करीब रखते हो.
क्या खूब लगते हो-२.
Dedicated to Firoz Khan’s songs
RSD
जो शाम गुजर गयी मुझे उसका इंतज़ार नहीं
जो शाम आने वाली है मुझे उसका भी ख्वाब नहीं।
क्यों की मेरी तन्हाइयों का कोई आदि नहीं
कोई अंत नहीं।
RSD
अदाओं में वो हैं समंदर
तो दर्द के हम भी सिकंदर.
हुस्न पे उन्हें है अपने गुमान
तो छपरा के हम भी हैं धुरंधर।
RSD
दर्दे-जिगर का इम्तहान है बस यही
दर्दे-दिल को कभी मिटाया नहीं जाता।
RSD
ना मिले वो हमसे मेरे मुस्कराने के दौर में
अब कहते हैं की हमें मुस्कुराना नहीं आता.
ना सुनी जिसने शिकायत कभी किसी की
उसकी शिकायत है की उसे कहीं सुना नहीं जाता।
मिले जितने भी मोड़ अबतक जिंदगी की राह में
दिवाली की रात भी अब उन्हें भुलाया नहीं जाता।
मोहब्बत करने के शौक को ऐसे उसने उतारा सरेआम
अब नजर से नजर में इश्क़ फ़रमाया नहीं जाता।
हसरते जवानी के दौर की
किस्सों में किसी को सुनाया नहीं जाता।
मिले कोई अब कितना भी हंसकर
अपना कहकर उसको, हमसे बुलाया नहीं जाता।
रोके रखेंगे अश्कों को यूँ ही दिल ही में
अश्कों से जुल्मो-सितम को मिटाया नहीं जाता।
रिस्ता निभाए तो कोई क्या इस दौर में, जहाँ फेसबुक,
इंस्टाग्ग्राम, ट्विटर के बहार कोई रिस्ता बनाया नहीं जाता।
RSD
मेरी जान मोहब्बत में
कई रात रोया हूँ.
टुटा हूँ हर रोज खुद में
पर भूल ना पाया हूँ.
RSD
ना जुल्म कर इतना
की ये दिल है, जिस्म नहीं।
बस एक मुलाकात मांगी है
तेरा जहाँ नहीं।
RSD