अभी रात का सफर है, दिन की क्या आरजू करें
खंडहरों में रहने वाले किसी से क्या गुफ्तुगू करें?
ख्वाब भी नहीं आते, इस कदर मुफलिसी है
जिंदगी को अब और कैसे बेआबरू करें।
मिला ना ऐसे कोई की करें दिल के हालत बयान
सभी की हसरतें थी की हम बस जी-हजूरी करें।
RSD
अभी रात का सफर है, दिन की क्या आरजू करें
खंडहरों में रहने वाले किसी से क्या गुफ्तुगू करें?
ख्वाब भी नहीं आते, इस कदर मुफलिसी है
जिंदगी को अब और कैसे बेआबरू करें।
मिला ना ऐसे कोई की करें दिल के हालत बयान
सभी की हसरतें थी की हम बस जी-हजूरी करें।
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अपनी बर्बादियों पे मुस्करा रहा हूँ मैं
और जमाना कहता है, कुछ छुपा रहा हूँ मैं.
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ए ग़ालिब बता कैसे काटे हम ये जिंदगी?
अधरों पे प्यास, मयखाना पास और जेब तंग हैं.
RSD
कश्तियाँ लहरों पे, किनारों की तलाश में
तेरी जवानी, मेरा शहर पूरा का पूरा आग में.
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रौशनी को ही ढूंढते रहोगे या जलाओगे चिरागों को भी
मोहब्बत ही करते रहोगे या बनाओगे किसी को अपना भी.
बहुत मुश्किल है काटना अकेली ये जिंदगी
जवानी तो गुजर गयी भटकने में, भटकोगे क्या भुढ़ापे में भी.
RSD
जो मिल रहे हैं तुझसे वो तेरे अपने है क्या
जो दूर हैं वो देख रहे तेरे सपने है क्या?
मैं नहीं तो तू नहीं, तू नहीं तो मैं नहीं,
बस ये ही एहसास है मोहब्बत
इसके आलावा भी कोई मोहब्बत है क्या?
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काला काजल तेरी आँखों में उतर कर किसी का ख्वाब बन गया
जो भी मिला, मिलकर तुझसे, तेरा गुलाम बन गया.
तेरे पावों को चूमकर इतराते हैं धूल-कण
तेरी गालों पे बरस कर, बादल झूम रहा.
तेरी बलखाती कमर पे सारा जहाँ थम गया.
कौन जी रहा है जिंदगी, एक नाम तो बता
तूने जिससे भी मुख फेरा, वो ख़ाक बन गया.
तू खोले अपनी खिड़की या किवाड़ तो करने को दीदार
तेरे दर पे आके सारा जमाना बैठ गया.
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ये दुनिया के धोखे, ये रिश्ते, जमाना
मेरी सरहदों को ना नापे ज़माना।
क़यामत की रात को होगा फैसला
किसका खुदा है और किसका है जमाना।
गैर भी मिलकर समझाने लगे हैं
कब हुआ है किसी का कभी ये जमाना?
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तू कैसे चढ़ लेती हैं सीढ़िया मेरे खुदा के दर की
उसके मासूम बन्दों को मिटा के.
अरे बेबसी देख मेरे खुदा की
ऐसे सितम पे भी बैठा है मौन धारण कर.
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मेरी जिंदगी को दर्द यूँ डुबाने लगा
ना प्यास ही मिटी ना यार ही गले लगा.
वो सबको सुला रहीं हैं अपनी बाहों में
बस एक हमसे ही पाक रिश्ता उनका रहा.
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