बिजली बन गयी है


तू अब ऐसी हसीं बन गयी है
की किसी की जमीन बन गयी है
बादल बरसे भी तो अब कहाँ
तू उनमे छुपी बिजली बन गयी है.

जेठ की दोपहरी में बरगद की छाया
तू वही ठंडी छाँह बन गयी है.
प्यास से दहकते अधरों के लिए
शीतल, सरिता बन गयी है.
आईने भी दरक रहे हैं तेरे कटाव पे

RSD

समंदर


मिला जो समंदर, वो बेचैन बहुत था
मैं अविवाहित और वो तन्हा बहुत था.
हजारों दरियाएँ बाहों में सिमटी
मगर रूह में उसके प्यास बहुत था.
मिला जो समंदर, वो बेचैन बहुत था
मैं अविवाहित और उसमे दर्द बहुत था.

RSD

कू-ए-यार में


किसकी मोहब्बत सजी है नसीब की राह में,
यार ज़मीन भी दे, जिस्म भी दे—तो क्या?
बेवफ़ाई ही तो रहती है कू-ए-यार में।

दिल ने तलाश की थी सुकूँ उसकी आगोस में,
घाव ही घाव मिले हमको कू-ए-यार में।

हमने भी चाहा था उम्र गुजरे उसकी बांह में,
नाम तक ना रहा अपना अब कू-ए-यार में।

रातें गुज़र गईं उसकी चाह की याद में,
ख़्वाब टूटते रहे चुपके चुपके हिसार में।

जिस्म और जाँ भी मिले हों तो क्या हुआ ऐ दिल,
वफ़ा कभी नहीं मिलती कू-ए-यार में।

हम तो खुश थे उसके झूठे इकरार में,
अब नाम भी कोई याद करता नहीं कू-ए-यार में।

RSD

Inspired by the Sher, “कितना है बद-नसीब ‘ज़फ़र’ दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में”, this is my reply to it.

दम्भ है वीरों का


टूट कर भी तारे अम्बर के जमीन पे आते नहीं
ये ही दम्भ है वीरों का, वो हार से शर्माते नहीं।

RSD

हर लम्हा


ये ज़िन्दगी भी क्या है कि टूटे हैं थोड़ा-थोड़ा हर लम्हा,
ज़िंदा हैं कि क़लम लिखती है बस उसी को हर लम्हा।

चाहा था कि कभी तो सुकून आएगा दिल को,
पर मिलती रही बेताबी की ही सजा हर लम्हा।

आईना भी अब चेहरा देख कर है चुप सा,
बयाँ करता नहीं है मेरे दर्द का किस्सा हर लम्हा।

रिश्तों की किताबें भी अब बोझ लगती हैं,
अधूरी सी कहानी है उनमें छुपा हर लम्हा।

ख्वाबों ने भी अब आंखों से नाता तोड़ लिया,
बस बचा है सहर होने का धोखा हर लम्हा।

चल पड़े हैं सफर में मगर मंज़िलें गुम हैं,
थक कर गिरते हैं फिर संभलते हैं हर लम्हा।

दर्द भी अब अपना सा लगने लगा है,
जैसे कोई अजनबी था बना अपना हर लम्हा।

‘परमित’ लिखता है फिर भी मोहब्बत की बातें,
शायद इसी बहाने बच जाए वजूद हर लम्हा।

RSD

हारा हुआ ये मन विजय की कामना में है


हारा हुआ ये मन विजय की कामना में है,
ना वासना में है, ना ही ये पालना में हैं।
थक चुके पाँवों को अब भी चलना ही है,
कर्तव्य-पथ पे निरंतर बढ़ना ही है।
टुटा हुआ ये मन, उड़ान की कामना में है,
हरा हुआ ये मन, विजय की कामना में है।

सपनों की गंगा बहती है दिल में प्यास लिए,
राहें कठिन सही, मन फिर भी विश्वास में हैं।
जीत की ज्योति जलती है हर इक प्रयास पे,
दूर नहीं मंजिल, सफलता बस दो हाथ पे है।
उड़ना है फिर से, नभ मेरे इन्तिज़ार में है।

RSD

थोड़ा ठहरकर


तू मिलता, तो मुस्कुरा भी लेता,
शहर में तेरे थोड़ा ठहरकर।
तेरे बिना कुछ भी नहीं बाकी,
ज़िंदगी बिखर गई, एक रात संवरकर।

हवाओं ने भी तेरा हाल पूछा,
मैं जब भी निकला इन गलियों से होकर।
हर रास्ता कुछ कह लेगा फिर से मुझसे
जो चले हम दो कदम साथ मिलकर।

RSD

मायके आना-जाना है


वो जिनको मिली मोहब्बत की कई दुकानें,
उनकी किताबों में भी मेरा चर्चा है।
मैं यूँ ही नहीं बदनाम हूँ ज़माने में,
उनका अब भी मायके, आना-जाना है।
हर इक मोड़ पे आज भी रुक जाते हैं पाँव मेरे
जैसे शहर में यहीं-कहीं उनका ठिकाना है।
जो बात नहीं कह सके थे बरसों तक,
ये कलम लिख रही अब वो ही अफ़साना है।

सारे समंदर कुछ भी नहीं, एक इश्क़ के दर्द के आगे,
उसकी प्यास मिटती नहीं, हज़ारों बाहों में उतारकर।
लब मुस्कुराए भी तो क्या, आँखें बयाँ कर बैठीं राज,
छुपा न सका दिल का आलम, हर इक नजर को टालकर।
वो हर किसी में ढूँढती है शायद मेरी परछाईं,
मैं रह गया हूँ खामोशियों में खुद को टटोलकर।
मेरी बाँहों में कोई उतरती नहीं अब उम्रों से,
बैठा हूँ तन्हाई की छत पर, सारी प्यास समेटकर।
कई बार चाहा उसे भुला दूँ इस कदर,
पर लौट आता हूँ उसी मोड़ पर, सब कुछ भुलाकर।
वो जो गया तो लौट कर देखा भी नहीं पीछे,
मैं रह गया उस रास्ते को हर रोज़ सँजोकर।

RSD

मेरी कहानी


तू आज तड़पाने में मसरूफ़ है,
कल तेरी तड़प मेरी कहानी होगी।

RSD

गुस्ताखियाँ


संभाल के रख अपनी अदा,
हुनर को
मैं भी जी रहा हूँ, कमा रहा हूँ
सिर्फ करने को इनसे
हर रात गुस्ताखियाँ।

RSD