संभाल के रख अपनी अदा,
हुनर को
मैं भी जी रहा हूँ, कमा रहा हूँ
सिर्फ करने को इनसे
हर रात गुस्ताखियाँ।
RSD
संभाल के रख अपनी अदा,
हुनर को
मैं भी जी रहा हूँ, कमा रहा हूँ
सिर्फ करने को इनसे
हर रात गुस्ताखियाँ।
RSD
छलकने से पहले तेरे आँसु खबर हो जाती है मुझे
तुम्हे अब भी यकीन नहीं की किस कदर चाहा है तुझे
तेरी ख़ामोशी को तुझसे पहले समझ लेता हूँ मैं,
तुझसे पहले राह के काँटों पे पाँव रख लेता हूँ मैं.
तेरे इश्क़ का सागर इतना गहरा है मेरे दिल में,
डूबकर हर बार बस नया साहिल मिलता है इसमें.
तू चाहे जितना भी दूर है मुझसे अभी इस पल में,
मैंने दिल की धड़कनों में सदा ही पाया है तुझे.
RSD
तेरे अंगों पे जो अंग मिले
पुष्पों में तब मकरंद बने
हुई चाहत परागों की
तब पाने को भौरें मचल उठे.
तेरे अंगों की मदिरा
अधरों पे मेरे अमृत बन जाए ।
ऋषि छोड़ के मोक्ष का मार्ग
तेरे नयनों के भवर में उपलायें।
चाँद की चाँदनी चुपके से,
उतर के तेरे आँचल में ठहर जाए।
सदियों की प्यास बुझाने को,
तेरे वक्ष जिया को ललचायें।
RSD
धुप ये शहर की मेरे गावँ सी नहीं
कमर तेरी पतली मेरे यार सी नहीं।
ढूंढता हूँ जिसको वो सितारों में नहीं
चमकीली ये दुनिया मेरे बिहार सी नहीं।
जहाँ हम ही हम थे और थे बाग़ मेरे
मोहब्बत की वो जमीन यहाँ तो नहीं।
तुम कहते हो हम भुला दें वो बातें
हम कहतें हैं, वो दिल हैं कोई याद तो नहीं।
ये रंग बाजारों का, उन गुब्बारों सा नहीं
जिसे फोड़ते भी हम थे और फुलाते थे हमीं।
मीठी है तो, मुबारक तुम्हे ये दुनिया
इन सपनों में मेरा वो गावं तो नहीं।
कदम जो ये उठे थे जिस मुकाम के लिए
उस मुकाम पे मेरा वो मकान तो नहीं।
चूल्हे की चाय से काट जाती थी सर्दी
वो गैंठी सुलगाती मेरी माँ तो नहीं।
दिल चाहे वो गलियाँ जिसपे पेड़ हों
छावं में जिसके बैठते सब एक हो.
ऐसी होगी जिंदगी, मैंने सोंची तो नहीं।
ये शोर, ये धुंध मुझे रास आती नहीं।
यहाँ चेहरों के पीछे कहानियां कई
वहाँ चौखट के पीछे भाभियाँ कई.
यहाँ पब-बार में मज़ा पनघट का तो नहीं
जो चला था वहाँ से वो यहाँ मिलता भी नहीं।
वो छोड़ा जिसे इस महफ़िल के लिए
ये महफ़िल हमें जानती भी नहीं।
वो माटी वो महुआ, इस मदिरा से थी नशीली
और वो नशा आज तक उतरा भी नहीं।
RSD
सपनों का शहर अब खिलौना बन गया है
मौसम कोई भी हो, गम बिछौना बन गया हैं.
जिन बाहों को हमने पहनाई चूड़ियाँ
कल रात उन चूड़ियों को कोई तोड़ गया हैं.
किस-किस का हिसाब
किस-किस की किताब में लिखा है.
मेरी कलम ने बेवफा में
सिर्फ उसका नाम लिखा है.
RSD
मोहब्बत के बिना भी जिंदगी होती है
सिर्फ किताबों में ही नहीं, असलियत में भी.
मुस्काराने से राह आसान होती है
जमाने में ही नहीं, आईने से भी.
RSD
नजर की ख्वाइस, नजर भर रही
शहर को पता है, वो बस सहर भर रहीं।
मैं बुलाता भी उनको तो कैसे मगर?
जो उम्र भर का कह के, बस एक पहर भर रहीं।
सुना है शहर में ऐसा कोई घर नहीं
जहाँ नहीं वो कभी एक पहर भर रहीं।
RSD
वक्त ऐसा भी नहीं
तारीफ़ के मैं काबिल नहीं
वक्त जिसको भी देख रहा
वो मेरा साहिल नहीं।
ख्वाब कितने टूट गए
फिर भी मैं चल रहा
रुक जाऊं मैं कहीं
वो शहर मुझे मिला नहीं।
तू खुदा हैं कहीं तो
दिख मुझे रहा नहीं
मैंने जिसे खुदा कहा
वो मेरा अब रहा नहीं।
उम्र भर की ख्वाइशे
सिमट कर जहाँ एक हुई
वो भी कोई चुरा गया
किस्मत का धनि मैं रहा नहीं।
दर्द में डूबी हो रात
और वो ना याद आएं
हो वो एक ना ख्वाब आयें
ऐसी कोई रात यहाँ नहीं।
RSD
मैं अपनी राहों को नहीं बदलूंगा, मैं अपने राही बदल लूंगा।
मंजिलें मेरे इंतज़ार में हैं, तो मैं मोहब्बत छोड़ दूंगा।
कितने ऐसे जिस्मों को छोड़ा हैं जिंदगी के इम्तिहान में
मैं इम्तिहानों से नहीं, खुशियों से मुख मोड़ लूंगा।
RSD
अंगों-ने-अंगों से टकरा के बिजली बना दी
कम्बख्त फिर जलने से कौन बचता?
सबने कहा की परमित ना जा उसके पास
मगर राजपूत रण से पीछे कैसे हटता?
जवानी है, जवानी है, जवानी है-२
तभी तो निगाहों में कहानी है.
कोई बंद कमरे में सुलग रहा
कोई बहती दरिया का पानी है.
वक्त के भीड़ में तुम्ही बगल गए
हम तब भी, अब भी अकेले हैं.
तेरी आँखे ऐसी, की तनहा शराब हो गयी
तेरे जिस्म पे रेंग के हवा मेरे गावं की
जो मीठी थी, अब आग हो गयी
तू क्या खुद को संभाल रही है और किसके लिए
बिहार में चर्चा है की तू अब जवान हो गयी.
RSD