वो जो अपनी जुल्फों में हैं रात को समेटे
गेसुओं को खोल दें तो मेरा चाँद निकले।
वो जो हया में अपने बंध के मंद-मंद मुस्करा रहे हैं
ये पर्दा हटा दें तो मेरा चाँद निकले।
हजारों आड़ावों से भरी है उनकी खिली जवानी
जरा जाम छलका दें तो मेरा चाँद निकले।
RSD
वो जो अपनी जुल्फों में हैं रात को समेटे
गेसुओं को खोल दें तो मेरा चाँद निकले।
वो जो हया में अपने बंध के मंद-मंद मुस्करा रहे हैं
ये पर्दा हटा दें तो मेरा चाँद निकले।
हजारों आड़ावों से भरी है उनकी खिली जवानी
जरा जाम छलका दें तो मेरा चाँद निकले।
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मेरा दर्द मेरी राहों का काटा बन रहा
प्यास मेरी मंजिल को धुंधला कर रहा.
आँखे इस कदर चौंधियाने लगी हैं
की ये शहर मुझे मेरे गावं से अलग कर रहा.
शोहरत की चाहत पगडंडियों पे चलके
तो मिलती नहीं।
और इनके सड़कों पे भागते मेरे पाँव
और ये थकान, मुझे मेरे ख्वाबों से दूर कर रहा.
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इस जिंदगी में कोई गुनाह कर ही नहीं पाए
इस कदर मोहब्बत किये बैठे थें.
वो आई, मिली, मुस्कराई और चली गयी
हम पहली ही नजर में सब कुछ लुटाये बैठे थे.
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जो वक्त को थाम ले वो नजर हैं उनकी
जो बच निकले हैं इनसे, कभी देखि हैं हालत उनकी।
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दिल को जलाकर पिए जा रहे हैं
बचा अब ना कुछ भी, पर जिए जा रहे हैं.
किसको पुकारे, कौन है यहाँ अपना
मुख को हाँ मोड़ें हाँ सभी जा रहे हैं.
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उलझने सुलझाऊँ या जिंदगी बसाऊं, इसी कश्मकश में रहा.
उनको मनाऊं या खुद से ही रूठ जाऊं, इसी कश्मकश में रहा.
हालत कुछ यूँ बदल गए, की खुद को बदलूँ या हालात बदलूँ, इसी कश्मकश में रहा.
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फैसला ना करो कभी खुदा के डर से, दी हैं जिंदगी को तो एतबार रहो
डूबने नहीं देगा वो कश्तियाँ तुम्हारी, मगर तुम भी तो हाथ में पतवार रखो.
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आसान बन जाती है जिंदगी तेरे मुस्कुराने से
और मेरी कोशिश है की तू मुस्कराये।
पर बहुत काँटे हैं मेरी दामन में
और डर है की एक भी तुम्हे न लग जाए.
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इशारों-इशारों में उसने बता दिया
कुछ भी नहीं मिला उससे घर बसाकर।
मैं टुटा और टूट कर बिखर गया
वो भी तन्हा रही सेज को सजाकर।
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तेरी जवानी का जब भी चर्चा चला
मयखानों में मेरा नाम चला.
तेरी हसरतों को पाले हुए सब जावाँ
उन्हें मेरे हस्र का पता चला.
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