मेरी जिंदगी को दर्द यूँ डुबाने लगा
ना प्यास ही मिटी ना यार ही गले लगा.
वो सबको सुला रहीं हैं अपनी बाहों में
बस एक हमसे ही पाक रिश्ता उनका रहा.
RSD
मेरी जिंदगी को दर्द यूँ डुबाने लगा
ना प्यास ही मिटी ना यार ही गले लगा.
वो सबको सुला रहीं हैं अपनी बाहों में
बस एक हमसे ही पाक रिश्ता उनका रहा.
RSD
तपिश बढ़ी धरती की तो बादल छा गए
बरसने ही वाले थे की हवा उन्हें उड़ा गए.
यूँ ही रह गयी प्यास मेरे अधरों पे
नजरें लड़ाते-लड़ाते वो मेहँदी रचा गए.
RSD
वो अलग लोग थे जो भेजते थे बादलो से पैगाम
ये हम हैं जो हरे पत्ते पे लिख देते हैं तेरा नाम
तू जब जुल्फों को बांधे इनके फूलों से तो ये गुनगुना दें
तेरे कानों में धीरे से कैसे गुजरती है तेरे बिना मेरी शाम.
RSD
तेरी शर्म तुझपे ही नहीं मुझपे भी भारी है
हो जाने दे कोई गुनाह, इस मोड़ पे वो जरुरी है.
तू कल खंजर भी उतार दे तो कोई गम ना होगा
आज किओ रात बस तेरी ही जी हुजूरी है.
RSD
हुस्न जब भी मिला उनका एक नशा सा छा गया
बेवफा ही सही वो, मगर मजा तो दे गया.
अधरों को अधरों पे टिका कर, वो बहुत कुछ सीखा गया
वक्षों तक आते-आते, वो खंजर भी उतार गया.
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वो मिली और बैठी इतने करीब में
तन्हाई लिख गयी ताउम्र मेरे नसीब में.
दरिया कब हुई है किसी किनारे की?
मगर डूबते हैं वो इसी यकीं में.
RSD
अब बारिशों का मौसम वैसा न रहा
रूह, रूह न रही, दिल, दिल न रहा.
सुखाता नहीं हूँ जिस्म को अब भींगने के बाद
दुप्पटे पे उनके मेरा हक़, अब वो हक़ न रहा.
RSD
तेरा मुस्कराना, अब वो मुस्कराना न रहा
तेरा दीवाना, अब वो दीवाना न रहा.
तूने रचाई मेहँदी ऐसे किसी के नाम की
बनारस बसने का मेरा इरादा, इरादा न रहा.
हसरतों को ऐसे दफना गयी वो मेरे
फाइलों को चूमने का कोई बहाना न रहा.
उन्हें ही देख के सजाता था वीरान ठिकाने को
उन्हें देखने का वो अब अपना ठिकाना न रहा.
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दुनिया मेरी, सिक्के मेरे, कुछ भी मेरा न चला
वो कभी फिर ना मिली, कुछ भी फिर न मिला।
तड़पता रहा उम्र भर मैं, दर्द ही ऐसा लिया
दवा कोई, दुआ कोई, कुछ भी असर ना मिला।
RSD
हुस्न ढला, तो वो घर बसा गयी
दिल टुटा तो मुझे अक्ल आ गयी.
ना रहा भेद जरा भी ख़ुशी और गम में
जिंदगी ऐसे-ऐसे रंग दिखा गयी.
दोस्त कह कर वो ले गए महफ़िल में
वहाँ उनको दुश्मनी याद आ गयी.
वो मिली तो मुझे जान, जानू, दुनिया बना गयी.
सब बना के, शौहर किसी और को बना गयी.
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