है जिंदगी कितनी खूबसूरत


है जिंदगी कितनी खूबसूरत अभी इन्हे पता नहीं है
पिता के पथ के पत्थरों का जिन्हे अभी तक पता नहीं है.
आँखों की जिनकी मीठी नींद को माँ कई रात सोइ नहीं है.
माँ के चरणों में जिन्होंने सर अभी तक झुकाया नहीं है.
है जिंदगी कितनी खूबसूरत अभी इन्हे पता नहीं है.
क्या लिखें शब्दों में तुम्हे, आँखों ने तुम्हारे बाद कोई देखा नहीं है?
प्यासे हैं वो ही अधर, जिन्होंने शिव भांग आपका चखा नहीं है.
है जिंदगी कितनी खूबसूरत अभी इन्हे पता नहीं है.

RSD

सफर


प्राप्त क्या करे इंसान जब प्यास अधरों पे हो?
गुनाह क्या करे इंसान जब जिंदगी किसी की बाहों में हो?
रहा भी ना जाए बिना सोये जब किसी की जुल्फों में
रहा भी न जाए जब किसी को थामे बाहों में
तो थके भी कैसे, जब सफर किसी के आगोस में हो?
दूर जाए भी तो क्या इंसान, जब संसार किसी के वक्षों पे हो?

RSD

मेरे गजानन


प्रभु, प्रभु आपके चरणों का मैं एक दास हूँ
मेरे गजानन, नित्य करता मैं आपको प्रणाम हूँ.
लाज रख लो मेरी मेरे गणपति,
मेरे गजानन, हर तरफ से हारा, मैं एक लाचार हूँ.
कुछ भी नहीं आँखों में मेरे आँसूं के सिवा
मेरे गजानन, हर तरफ से ठुकराया, मैं इतना कंगाल हूँ.
मौत से पहले एक जीत तो दे दो
मेरे गजानन, थका -हारा मैं इतना हतास हूँ.
कैसे छोड़ दूँ ये आस आपसे मेरे गणपति
मेरे गजानन, जब मैं केवल आपका ही ख़ास हूँ.

RSD

मेरे देश की धरती


मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे – मोती
मेरे देश की धरती।
सींचे जिसको गंगा-जमुना, और कावेरी लहराती
मेरे देश की धरती।
जहाँ पतली कमर तरकस सी, नैनों से बाण चलाती
मेरे देश की धरती।
माँ के तन पे फटी है साड़ी, फिर भी माँ मुस्काती
मेरे देश की धरती।
पूजते हैं बैल – गोरु, और गाय रोटी पहली खाती
मेरे देश की धरती।
भयभीत होकर जहाँ से लौटा सिकंदर, ऐसी बिहारी छाती
मेरे देश की धरती।
जहाँ नानक-कबीर के दोहों को, दादी-नानी हैं गाती
मेरे देश की धरती।
जहाँ पग-पग पे प्रेम मिले, पल-पल में मिले थाती
मेरे देश की धरती।
सौ पुश्तों तक लड़े शिशोदिया, रंगने को बस माटी
मेरे देश की धरती।
जहाँ धूल में भी फूल खिले, पत्थर नारी बन जाती
मेरे देश की धरती।
सर्वश्व दान करके, बन गए भोलेनाथ त्रिलोकी
मेरे देश की धरती।
पिता के मान पे श्रीराम ने कर दी गद्दी खाली
मेरे देश की धरती।
भगीरथ के एक पुकार पे, स्वर्ग से गंगा उतरी
मेरे देश की धरती।

मिट गए हूण टकरा के स्कंदगुप्त से, किनारो पे लहरे मिटती
मेरे देश की धरती।
जहाँ हर दिल में गणपति, और नित्य होती उनकी आरती
मेरे देश की धरती।
इस मिटटी की यही बात है यारों, यहाँ मिट जाती हर दूरी
मेरे देश की धरती।
काँधे पे जहाँ हल शोभित और हाथों पे चमकती राखी
मेरे देश की धरती।
खेत-खलिहान, बँसवारी से पनघट, नैनों से नैन लड़ाती
मेरे देश की धरती।
पतली-कमर, बाली-उम्र, डगर-डगर, चढ़ती जवानी, इठलाती
मेरे देश की धरती।
कितना लिखूं,लिखता रहूं, खुशबू फिर भी नहीं मिटती?
मेरे देश की धरती।

RSD

दुनिया से हम लड़के


मिलती रहो हमसे यूँ ही बहाने करके
तुम्हे अपना बनाएंगे दुनिया से हम लड़के।
पिलाती रहो हमको बस यूँ ही अधरों से
तुम्हे अपना बनाएंगे दुनिया से हम लड़के।
जब संग ही हमारे हो, मुख पे ये भय कैसा?
तुम्हे उठा के ले जाएंगे हम तुम्हारे ही घर से.
यूँ ही नाम नहीं मेरा, जमाने में यहाँ
तुम भी बोल के देखना “पृथ्वीराज” एक बार आँगन में.

RSD

भरम


सरेआम दिल को ठुकरा कर वो जा रहे हैं मुस्कराकर
ना रहीं अब ख्वाइशें, ना रहा कोई ही भरम.


लिख भी दूँ तो क्या लिखूं, ये कलम -दवात बता?
लिखने से भला कब मिटा हैं किसी के दिल का दरद?


थाम रहीं हैं मेरे सामने ही वो किसी की बाहों को
जाने कैसे ज़िंदा हूँ, ना हट ही रही उनसे नजर.

RSD

सखी


रे सखी, रे सखी, रे सखी
बाटे, आसमा में चाँद रे सखी
लागल दिल में घाव रे सखी.

उड़ गइल चिड़ैया डाल से
रह गइल बस घोषला।
कैसे बुझाईं, तू ही कह$?
मन के ताप रे सखी.
रे सखी, रे सखी, रे सखी
बाटे, आसमा में चाँद रे सखी
लागल दिल में घाव रे सखी.

दूयेगो दिन न खनकल कंगना
दूयेगो रात न बाजल पायलिया।
केकरा के देख के अब सुलगाई
चूल्हा के आग रे सखी.
रे सखी, रे सखी, रे सखी
बाटे, आसमा में चाँद रे सखी
लागल दिल में घाव रे सखी.

ना रहल मायका अब आपन
ना बनल ससुराल ही आपन
तहरा के छोड़ के, के-के सुनाई
दिल के हाल रे सखी.
रे सखी, रे सखी, रे सखी
बाटे, आसमा में चाँद रे सखी
लागल दिल में घाव रे सखी.

RSD

प्रिये


तड़प रहा है कोई तुम्हारे प्यार में प्रिये
और तुम हो की मग्न हो किसी और के संसार में प्रिये।

RSD

भोलेनाथ आपकी जो कृपा हो जाए


भोलेनाथ आपकी जो कृपा हो जाए
ये भगीरथ भी सनाथ हो जाए.
है जीवन में मेरे भी कुछ अभिलाषा हाँ प्रभु
आप देख लो, तो सारी ही पूर्ण हो जाए.
आप त्रिपुरारी, त्रिलोकी, महादानी भोलेनाथ
आप देख लो, तो रघुकुल का कल्याण हो जाए.

आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला


मैं तन्हा -तन्हा सा एक मुसाफिर हूँ भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना काफिर हूँ भोला।
बस दो ही पल संग मुझे बिठा ले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।
मैं लुटा-हारा सा एक स्वार्थी, तू महादानी ए भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना पापी हूँ भोला
बस दो ही घडी, चरणों में बिठा ले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।
मैं माया-मोह में तू निर्मोही ए भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना कपटी हूँ, भोला।
बस दो ही क्षण गले से लगाले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।

RSD