खुदा तेरी चाहत का ये कैसा मिसरा है
लिखता हूँ तेरा नाम और लिख जाता छपरा है.
किस दर पे तेरे आऊं सजदा करने को
तेरे दर की कोई भी राह लूँ, वो ले जाती बस छपरा है.
RSD
खुदा तेरी चाहत का ये कैसा मिसरा है
लिखता हूँ तेरा नाम और लिख जाता छपरा है.
किस दर पे तेरे आऊं सजदा करने को
तेरे दर की कोई भी राह लूँ, वो ले जाती बस छपरा है.
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बहुत मुश्किलों में हैं मेरा, जिंदगी हर मोड़ पे छल कर रही है
प्यास मेरी है की मिटती नहीं, और वो अपने वक्षों पे चोली कस रही हैं.
मुझे यूँ ही बहका के हर बार वो पीछे हट जाती हैं
मेरी मोहब्बत, मेरी प्यास सबको वो वासना कह रही हैं.
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किसी को भी यकीं नहीं उनसे मेरी मोहब्बत का
ज़माना देखता है चेहरा, नहीं दिल मेरा, ऐसा ही है हुस्न उनका।
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मौसम के बदल जाने से बदल जाते हो तुम
तुम्हारी सोहबत में नहीं लेकिन बदले हम.
इंसानों की बस्ती में कई इंसान भी ऐसे हैं
जिन्हे कहते भी नहीं हैं कभी इंसान हम.
इरादा ही रखते थे तन्हा होने का हम
उनको कहते ही नहीं हैं कभी बेवफा हम.
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कहाँ बैठे हो हमसे दूर जाकर
आवो कोई ख्वाब बुने, बाहों को उलझाकर।
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तुम मेरे लिए क्या हो तुम्हे मालुम नहीं
और मैं तुम्हे बता दूँ, रहा अब वो वक्त नहीं।
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उनके मिलने के पहले घनी रात थी
उनके जाने के बाद एक चिराग है.
तेरी महफ़िल में तेरा इंतज़ार कर रहें हैं
कैसी जुदाई है खुद को ही इल्जाम दे रहें हैं.
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भीड़ में भी तन्हाई का सफर होता हैं
बिना मिले जिस्म के भी मिलन होता है.
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किसी न किसी की मोहब्बत में सभी बेताब हैं
जिंदगी किसी की ऐसी नहीं जो इस दर्द से अनजान है.
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