पन्ना


तुम अगर मिल जाते मुझे तो मैं तुम्हारा बन जाता
तुम मेरा चाँद मैं तुम्हारा सितारा बन जाता।
तुम सुबह की छिटकती धुप सी, मैं आँगन बन जाता।
तुम दरिया और मैं तुम्हारा समंदर बन जाता।

पर अब जब तुम नहीं मिली
तो मैं रह गया एक मुसाफिर बन कर
भटकता हुआ.
एक सितारा टुटा हुआ.
किताब का वो पन्ना
जिसपर कभी कुछ लिखा ही नहीं गया.
तुम अगर मिल जाती तो मैं पूरा किताब बन जाता।
पर अब जब तुम नहीं मिली
तो मैं रह गया बनके किताब का वो आखिरी पन्ना
जिस पर कुछ लिखा ही नहीं गया.

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इसी कश्मकश में रहा


उलझने सुलझाऊँ या जिंदगी बसाऊं, इसी कश्मकश में रहा.
उनको मनाऊं या खुद से ही रूठ जाऊं, इसी कश्मकश में रहा.
हालत कुछ यूँ बदल गए, की खुद को बदलूँ या हालात बदलूँ, इसी कश्मकश में रहा.

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पतवार


फैसला ना करो कभी खुदा के डर से, दी हैं जिंदगी को तो एतबार रहो
डूबने नहीं देगा वो कश्तियाँ तुम्हारी, मगर तुम भी तो हाथ में पतवार रखो.

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मेरी कोशिश


आसान बन जाती है जिंदगी तेरे मुस्कुराने से
और मेरी कोशिश है की तू मुस्कराये।
पर बहुत काँटे हैं मेरी दामन में
और डर है की एक भी तुम्हे न लग जाए.

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टुटा और टूट कर बिखर गया


इशारों-इशारों में उसने बता दिया
कुछ भी नहीं मिला उससे घर बसाकर।
मैं टुटा और टूट कर बिखर गया
वो भी तन्हा रही सेज को सजाकर।

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ना मिलो


ना मिलो, ना मिलो, ना मिलो फिर से आजमाने के लिए
हम तेरी सोहबत में थे, खुद को मिटाने के लिए.

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जवानी


तेरी जवानी का जब भी चर्चा चला
मयखानों में मेरा नाम चला.
तेरी हसरतों को पाले हुए सब जावाँ
उन्हें मेरे हस्र का पता चला.

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नजर


जो नहीं मेरे, वो तुम्हारे इस कदर
की रह-रह कर नजर जाए उधर.

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जी-हजूरी


अभी रात का सफर है, दिन की क्या आरजू करें
खंडहरों में रहने वाले किसी से क्या गुफ्तुगू करें?
ख्वाब भी नहीं आते, इस कदर मुफलिसी है
जिंदगी को अब और कैसे बेआबरू करें।
मिला ना ऐसे कोई की करें दिल के हालत बयान
सभी की हसरतें थी की हम बस जी-हजूरी करें।

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मुस्करा रहा हूँ मैं


अपनी बर्बादियों पे मुस्करा रहा हूँ मैं
और जमाना कहता है, कुछ छुपा रहा हूँ मैं.

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