सौभाग्य


खूबसूरत जिस्म पे कभी उनके,
मेरा भी हाथ था.
अब कहती हैं,
क्या ये मेरा कम सौभाग्य था.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हर रात बदल जाता है खाट उनका


मेरा दिल तोड़कर,
उनका अंदाज देखिये,
सारे शहर में हैं अब जलसा उनका।
बहुत खूबसूरत हैं,
ये ही, नाज है उन्हें,
हर रात बदल जाता है खाट उनका।

 

परमीत सिंह धुरंधर

भिखारी – मदारी


दाने – दाने पे,
उसने मेरा नाम लिख दिया।
यह मेरी किस्मत नहीं,
ना भाग्य है.
बल्कि ऐसा करके,
उसने मुझे भिखारी,
और खुद को मदारी लिख दिया।
मैंने भी गमझे से पेट में,
विकराल होते भूख को,
बाँध दिया।
दुपहरी में पीपल के नीचे,
खाट डाल के लेट गया.
मुझे मेरी गरीबी में भी खुसी हुई,
की आज मैंने,
उसके ऊँचे महलों के दर्प,
को बुझा दिया।

 

परमीत सिंह धुरंधर

पापा आप मेरी मदिरा थे


पापा – वो – पापा,
आप मेरा ख्वाब थे.
खुले बगीचे में,
बादल की बूंदों सी,
मिठास थे आप,
मेरी जिंदगी का.
हरी घास पे,
नन्ही बूंदों सी,
नयी सुबह थे आप,
मेरे हर सपने का.
पापा – वो – पापा,
आप मेरा ख्वाब थे.
आप गंगा थे मेरे,
मैं किनारों का पत्थर।
डूब कर आपकी धाराओं में,
चमक उठा जिसका कण – कण.
आप हिमालय थे मेरा,
जिसकी घाटी में,
पुलकित हुआ,
और प्राप्त किया,
दुश्मनों की आँखों में खलने वाला,
मैंने ये योवन।
पापा – वो – पापा,
आप मेरी बुलंदी थे.
पापा, आप मेरी वो मदिरा थे,
जिसका नशा,
आज तक उतरा नहीं।
जिसके आगे कोई और,
जाम नहीं।
जिसके स्वाद में,
आज तक साँसों की,
प्यास मिटती नहीं।
मैं अपना मोक्ष भी,
ठुकरा दूँ,
बैंकुठ भी ठुकरा दूँ,
बस आपकी गोद,
और दुलार की खातिर।
पापा – वो – पापा,
आप मेरी साहस थे,
मेरी दौलत थे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

सिंह सा दहाड़ लेता है


जिंदगी ने हर तरफ से तन्हा कर दिया,
उमीदों के हर किनारे को तोड़ कर,
बे- आसरा कर दिया।
फिर भी नशों में बहता ये खून,
जो राजपूती है,
उछाल लेता हैं,
उबाल लेता है.
संकट के हर घड़ी पे,
ये सिंह सा दहाड़ लेता है.
मैं मिटने की राह पर रहूँ,
साँसे टूटने की कगार पे रहे.
छाने लगते हैं जब भी,
हार की आंशका के ये काले बादल।
गिरते – गिरते भी, धूल में धूसरित होते भी,
ये खून, दुश्मनों को ललकार देता है.
मुझमे फिर से अहंकार भर,
जोश भर,
आखिरी क्षणों में भी,
राण-भूमि में, अरुंओं के सम्मुख,
नाव-योवन प्रदान करता हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न


नजाकत जहाँ हया छोड़ दे,
हया जहाँ वफ़ा छोड़ दे.
वो महफ़िल हैं दौलत की,
जहाँ हुस्न वादे-इरादे, इश्क़ छोड़ दे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

When you are not with me


I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
I cannot imagine life,
When you are not with me.
ये काली – काली रातें,
कैसे काटूंगी।
जो तुम ना मिले मुझको,
तो मर ही जाउंगी।
I don’t like my lips,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
I just want to die,
When you are not with me.
I don’t like to lie,
But it is true.
I don’t like to die,
But I have to.
I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.
प्यासी हूँ मैं प्यासी,
तेरे होंठों की.
जो तू ना मिला मुझको,
तो मर ही जाउंगी।
I don’t like the dark night,
When you are not with me.
I just want to hide,
When you are not with me.

 

Parmit Singh Dhurandhar

तुम मिल जाओ तो


जले रे मनवा,
जले रे तनवा।
तुम मिल जाओ तो,
छा जाए मेघवा।
बरसों से सुखी जमीं हैं,
बरसों से तपती जमीं हैं.
तुम मिल जाओ तो,
बरस जाएँ मेघवा।
पक्षी सारे उड़ गए,
पौधे सारे सुख रहे.
तुम मिल जाओ तो,
थिरक उठें मोरवा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

पशु – पक्षी


जब तक आसमान तुम्हारा है,
तुम पशु नहीं हो.
जिस दिन से जमीन तुम्हारी हैं,
तुम पक्षी नहीं हो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

नारी का संग होना भी क्या होना?


बुद्ध छोड़ गए यशोधरा को,
दिव्या – ज्ञान की खातिर।
राम लड़ गए रावण से,
एक सीता की खातिर।
कृष्णा भूल गए गोकुल – संग,
राधा की अटखेलिया,
बस एक युद्ध की खातिर।
लक्ष्य जीवन का साधित होगा साथी,
चाहे नारी हो या नारी संग में न हो.
जीवन तो तुच्छ हैं,
इसे क्या भोगना।
जिसका जीवन ही भोग – विलास हो,
उस नारी का संग होना भी क्या होना?

 

परमीत सिंह धुरंधर