सरदार पटेल का पुनःजन्म


कल रात मेरे सपने में सरदार पटेल आये और बोले इस जन्म में वो ही अमित शाह के रूप में भारत की सेवा को अवतरित हुए हैं. कश्मीर का जो काम अधूरा रह गया था वो इस बार पूरा कर के जायेंगें।
मैंने जैसे ही पूछा की नेहरू जी भी अवतरित हुए होंगे क्यों की वो कैसे ये देख सकते हैं? लेकिन सरदार पटेल कुछ बोलते उसके पहले ही वो अदृश्य हो गए और मेरी निंद्रा टूट गई. अब मन और भी व्यथित है की आखिर वो मेरे ही सपने में क्यों आएं? या ऐसा है की वो हर भारतीय के सपने में आये या आ रहे है और ये बात बता रहे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Kashmiri girl


If I have to marry a Kasmiri girl, I would not ask her religion. In other words, if every girl were bad, I would chose a Kasmiri girl without asking her age, character and religion.

Parmit Singh Dhurandhar

हम फिर भी लड़ेंगे काश्मीर के लिए


ये धर्म रहे,
या फिर ये धर्म न रहे.
कोई योगा करे,
या फिर योगा ना करे.
हम फिर भी लड़ेंगे काश्मीर के लिए,
क्यों की ये बना है,
सिर्फ मेरे हिन्दुस्तान के लिए.
कोई राम की पूजा करे,
या फिर पूजा न करे.
कोई गंगा में नहाये,
या फिर ना नहाये.
हम फिर भी सर कटाएंगे काश्मीर के लिए,
क्यों की ये बना है,
सिर्फ मेरे हिन्दुस्तान के लिए.
यहाँ हिन्दू रहें,
या फिर मुस्लिम रहें.
चाहे इस धरती पे,
सिक्ख-बौद्ध ही खेलें.
हम फिर भी लुटाएंगे,
सब कुछ अपना काश्मीर के लिए,
क्यों की ये बना है,
सिर्फ मेरे हिन्दुस्तान के लिए.
हम आपस में चाहे लड़ें,
या फिर न लड़ें.
हममें प्रेम हो,
या फिर ना हो.
हम फिर भी एक हो कर,
खून बहायेंगे अपना काश्मीर के लिए,
क्यों की ये बना है,
सिर्फ मेरे हिन्दुस्तान के लिए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

लड़की काश्मीर की


तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ।
तुम धीरे-धीरे चलना,
हर सुबह मुस्करा के.
मैं तुमको चाय पिलाऊं,
तुम मुझको खाना खिलाना.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
तुम सर्दी कहो तो,
मैं सर्दी कह दूंगा।
भरी दुपहरिया में,
कम्बल ओढ़ के हाँ.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ.
रोज तुम्हारी नखरों पे,
सुबहा-शाम हो.
रोज हमारी फरमाइशों,
से सजी रात हो.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
हर रोज एक नई,
नथुनी मैं तुमको दूंगा.
तुम सज-संवर के,
मुझसे मिलती रहना।
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ.

परमीत सिंह धुरंधर