Life without you,
Is just like morning dew,
Under the sunlight,
It has no life.
So, come back my dear,
I still have the same fire.
Parmit Singh Dhurandhar
These are just related to life as philosophy.
Life without you,
Is just like morning dew,
Under the sunlight,
It has no life.
So, come back my dear,
I still have the same fire.
Parmit Singh Dhurandhar
हर मोड़ पे मयखाना खोलूँगा,
ए इश्क मुझे इस कदर नाकाम बना,
शौहर को ढूंढते हुए ओ आये बुर्के में,
और कान मरोड़ के ले जाए अपने बच्चे को.
अलविदा ना कहिये,
लौट के आने का,
मै राह देखूंगा.
लौट के भी ना आये तो,
कोई गम नहीं,
हर सुबह,
उनके दरवाजे से गुजार जाऊंगा.
कोई दीदार ना हो तो ना हो,
हवावों में उनकी खुसबू से बहल जाऊंगा.
The guy is dreaming to be fail in his love.
परमीत सिंह धुरंधर
मेरी ताजपोशी पे, वो आई संवर के.
पंडतिओं के मंत्र, और वो थी मेरे जेहन में.
बाला की खूबसूरत, मेरी जरुरत बन गयी.
एक ही रात में, सारी धरती जन्नत बन गयी.
अब मिलती है सरे-आम सड़क पे,
और चलती हैं गले को बाहों में थाम के.
की झूलती हैं इस कदर मेरे जिस्म पे, हर घड़ी,
की रोएँ – रोएँ को उनकी चाहत हो गयी.
It about arrange marriage in India…how it change the life of a guy. There is nothing bad in such marriage compare to Love marriage. In fact, it is more romantic and more thrilling.
परमीत सिंह धुरंधर
ग़मों में है ये जिंदगी, इसे प्यार किसी का चाहिए।
ख़्वाबों में ही सही, मगर एक साथ किसी का चाहिए।
टूट रहें है सितारे एक-एक कर,
आसमां को भी अब चाँद एक चाहिए।
कब तक भटकता रहे बादल हवाओं की मस्ती में,
अब इस आवारेपन को भी मुकाम कोई चाहिए।
बिखर गयी पंखुड़ियाँ, बागों से दूर,
अब तो इन डालों पे भी नया बसंत चाहिए।
उमड़ – उमड़ कर नदियां ने देखा सब कुछ तोड़ कर,
अब इन धाराओं को भी कोई बाँधने वाला चाहिए।
ग़मों में है ये जिंदगी, इसे प्यार किसी का चाहिए।
ख़्वाबों में ही सही, मगर एक साथ किसी का चाहिए।
परमीत सिंह धुरंधर
We know that human have evolved from monkey. Further, every man dreams or tries to get a girl as we believe that women are for love. However, girls love dogs. To win the heart of a girl, one has to love dog or have to be creative like dog. Thus the guy who is not able to shed his genetically inheritable character from monkey at fast rate may not be able to win the heart of any girl. The fast you will adopt to this dog-dominated society, the better chance you have to get a girl.
Interestingly, in country like India, there is different kind of pressure on later stage of guys. They have to work hard to make money. Its like being a donkey. So here is the paradox: guys struggle upto their late thirties to make themselves as dog to get a girl (Monkey to Dog) and then later struggle to evolve as donkey (Dog to Donkey).
This brings the problem with the next generation. This has disturbed the process of natural selection. Now, the selection is not moving in the forward direction through the intermediate stages. It is triangular (monkey to dog to monkey). Therefore, it will take more time to get the final stage as we still have average population as moneky. When the average population will be dog then it will be two stage process (dog-donkey) and then it will be at higher rate.
Parmit Singh Dhurandhar
हर खूबसूरत गली,
मंजिल नहीं होती।
कुछ राहें,
सदा अँधेरे में होती हैं,
पर उनपे,
जिंदगियां बर्बाद नहीं होती।
आंसू बहाने से,
आँखे ह्रदय के करीब नहीं होती।
हुस्न वाले मोहब्बत में,
किसी एक की नसीब में नहीं होती।
दस – घाटों से गुजरने के बाद,
नदिया प्यासी होती है सागर के लिए.
भरी जवानी में हुस्न,
चारदीवारी में नहीं बंधती।
परमीत सिंह धुरंधर
दो पल की आरजू थी,
दो जिन्दगियाँ बदल गयीं।
उनके आँखों के काजल से,
रोशनियाँ बदल गयीं।
ठुकराती रहीं,
ता-उम्र वो मेरी मोहब्बत।
और जब भी मेले में मिलीं,
निशानियाँ बदल गयीं।
आज भी,
घूँघट में उनका चेहरा।
मगर जवानी ढलते-ढलते,
कई कहानियाँ बदल गयी.
चारपाइयों की कसरत,
भले मैंने नहीं की है.
पर दिया बुझाते-बुझाते,
कई चारपाइयां बदल गयीं।
परमीत सिंह धुरंधर
रिश्ते अगर झूठे हों,
तो उनको सींचना ज्यादा होता है.
धागे अगर कच्चे हों,
तो सहेजना ज्यादा होता है
ये नए लोगो की मोहब्बत,
इसमें रातों को, मिलना
कुछ ज्यादा होता है.
गहरी न हो जड़ें तो,
वृक्षों का टूटना ज्यादा होता है.
ये नए लोगो की मोहब्बत,
इसमें रातों को, मिलना
कुछ ज्यादा होता है.
पत्र सीमा से किसी फौजी का लेकर,
डाकिया घर तक लाता है.
उसे बिना खोले ही कोई,
काफी देर तक चूमता है.
ये नए लोगो की मोहब्बत,
इसमें ओठों और जिस्म का,
मिलना – मिलना, ज्यादा होता है.
ये नए लोगो की मोहब्बत,
इसमें रातों को, मिलना
कुछ ज्यादा होता है.
परमीत सिंह धुरंधर
तन्हा-तन्हा सा हूँ, तन्हाई लिए,
मैं अकेला ही हूँ शहर में, ये शहनाई लिए.
परमीत सिंह धुरंधर
नशा जीत में नहीं,
जंग में है.
सागर की लहरो में नहीं,
मजधार में है.
लड़ना है जिंदगी में,
चारो तरफ से फंस के.
तैरना है सागर को,
मजधार में डूब के.
जोश सागर के पार जाने या,
पहाड़ की छोटी पे चढ़ने में नहीं,
मौत तक प्रयास में है.
मजा लहूँ के बहने में नहीं,
उसके रिसने में है.
नशा तलवार की धार में नहीं,
उसके टकराव में है,
उसकी आवाज में है.
परमीत सिंह धुरंधर