तुम क्या समझोगे मेरी असमंजस को,
हर सितम में बस तुम्हारी ही तमन्ना है.
परमीत सिंह धुरंधर
These are just related to life as philosophy.
तुम क्या समझोगे मेरी असमंजस को,
हर सितम में बस तुम्हारी ही तमन्ना है.
परमीत सिंह धुरंधर
अधूरी तमन्नाएँ, शिकार करती हैं,
जिस्म पे नहीं, मन पे प्रहार करती हैं,
इनसे भी जो बच जाओ,
तो फिर, हताश करती हैं.
तो उठों, दोस्तों,
एक प्रयास हो.
ये मालुम है की हार निश्चित हैं मेरी,
मगर कहीं तो अपना विकास हो.
कब तक बहायेंगे ये आंसूं गरीब बनके,
अपनी ही बस्ती में अमीरों की जागीर बनके।
तो उठों, दोस्तों,
एक प्रयास हो.
अपने भी जीवन का,
कोई तो एक श्रृंगार हो,
ये मालुम है की हार निश्चित हैं मेरी,
मगर कहीं तो अपना विकास हो.
परमीत सिंह धुरंधर
The girl with the newspaper,
took my heart forever.
In the moving train,
first time,
I felt the heart-pain.
That night, I dreamed a lot,
because, she was so hot.
With black eyes,
and long hair,
took my heart forever.
The girl with the newspaper,
took my heart forever.
Parmit Singh Dhurandhar
प्रेम: मुझ इस बात का अफ़सोस नहीं की तुम मुझसे प्यार नहीं करती। बल्कि इस बात की ख़ुशी है की तुम बिना प्यार के भी मेरे साथ रहती हो.
प्रेमा: मैं इसलिए तुम्हारे साथ नहीं रहती की तुम्हे ख़ुशी मिले, न ही मैं इसलिए तुम्हे छोड़ के नहीं जा रही की तुम्हे दुःख होगा। मैं इसलिए तुम्हारे साथ हूँ क्यों की मैं जिंदगी को समझती हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
गुलशन में इतने हैं परिंदे,
क्या हैं ये सब जिन्दे?
साँसे तो चल रही हैं हवाओं की तरह,
मगर,
क्या इन हवाओं में, अब भी फूल हैं खिलते?
परमीत सिंह धुरंधर
तुम जब से छोड़ गए,
दिल टुटा – टुटा रहता हैं.
ये मत पूछ की मैं क्या हूँ,
मेरा सब बिखरा-बिखरा रहता है.
परमीत सिंह धुरंधर
प्यासा, प्यासा, प्यासा, प्यासा हूँ,
तेरी चाहत में एक तमाशा हूँ.
गैरत मेरी, तो कब की खो गयी,
अब तो बस, एक चाय का प्याला हूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी आँखों से शिकायत,
हर आँख कर रही है.
तेरी खुशियाँ, इतनी है नाजायज,
की हर माँ रो रही है.
कब तक रौंदेगा तू,
यों लाखो जिंदगी,
हर तरफ से अब एक ही,
ये आवाज आ रही है.
ढूंढता है जिसे तू यूँ,
दर-दर पे भटक के,
वो खुदा की नजर भी कोई,
अब रहनुमा ढूंढ रही है.
परमीत सिंह धुरंधर
बदलते वक्त ने रोना सीखा दिया,
रोते वक्त ने बदलना सीखा दिया।
और इस कदर तन्हाई है मेरे साथ दोस्तों,
की अंधेरों ने हर दिया बुझा दिया।
परमीत सिंह धुरंधर
Parmit Kumar Singh