पिता के पाँव को


हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

जब-जब हम थे तुतलाये, चूमा हमारे गाल को
जब -जब लौटे थे जीत के, चूमा हमारे माथ को.
पर जिस दिन था दुनिया को रौंदा, बोले पिता
मेरे माँ को, हे देवी, प्रणाम तुम्हे, नारी तुम महान हो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

तुमने पिता बनाया मुझको ऐसे हाँ पुत्र का
जो धरा पे रम रहा लिए दम्भ मेरे नाम का
क्षण -क्षण में ह्रदय में मेरे जो आनंद का भण्डार भरें
और पल-पल में सीना मेरा करता है विशाल जो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

RSD

Ahhh, I miss the color now


Life is a complete circle for someone
A linear road for others.
It is full of ups and downs and struggles for a majority
And full of dreams and beaches for the remaining.
For me, it started and will end at a single point.
The journey I started without any technology
And still got the most memorable patches of colors.
The path was full of dust but still contained a rainbow every day.
Even He can not compensate for the loss I suffered.
Today, I might be in the top ten percent, enjoying all the benefits of technology.
But still no rainbow, no fun, and no patches of color without dust.
When the heart of God loses its color
When dust and rain can not create the color of a rainbow
A father comes and fills the color for his son.
A father makes a rainbow, making the world colorful for his son.
Ahhh, I miss the color now.

RSD

माँ की ममता और पिता का दुलार


माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
फिर भी मन भटकता है, कितनो के द्वार
बस पाने को जीवन में प्यार।

माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
ये ही मेरे शिव हैं, ये ही मेरे विष्णु
इनकी चरणों में हैं चरों मेरे धाम.

माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
और किसने लुटाये हंस-हंस के अपने स्वप्न
और कर दी तुमपे अपनी खुशियाँ निसार।adher

RSD

पिता तुम्हारी चरणों में


पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.
पिता तुमसे बिछुड़कर अब मेरा जीवन धूल सामान है.
कहाँ मैं फिर उड़ा कभी, कहाँ अब वो मेरा आसमान है?
दाना तो चुग ही लेता हूँ, पर कहाँ अब वो मेरी उड़ान है?
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.

एक -एक करके हार रहा हूँ, हर युद्ध मैं बिना आपके रण में
विफल हो रही है मेरी हर चेष्टा, अटल मेरा परिणाम है.
विनती अब बस इतनी ही है, अगर सुन रहा है विधाता
हर जन्म में पुत्र आपका रहूं, हृदय की बस ये ही पुकार है.
गोद में तुम्हारे जो अमृत मिला, वो कंठ पे बन के अनंत प्यास है.
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है

Rifle Singh Dhurndhar

तन्हा हूँ पिता


ज़माने की भीड़ में इतना तन्हा हूँ पिता
की मेरी अंगुलियाँ भी एक -दूसरे को नहीं जानती।

Rifle Singh Dhurandhar

पिता की ये काया


जुल्फों का तुम्हारे जब घना होगा साया
कहाँ तुम्हे याद होगा पिता की ये काया?
आँखों में शर्म और मुख पे होगी जब चंद्र की छाया
कहाँ तुम्हे याद होगा पिता की ये काया?
दो ही पलों का, बस यह मोह -माया
कहाँ तुम्हे याद होगा पिता की ये काया?

Rifle Singh Dhurandhar

वो भी क्या दिन थे?


वो भी क्या दिन थे?
पिता के साथ में
हम थे हाँ लाडले
आँखों के ख्वाब थे.

जो भी माँग लिया
वो ही था मिल जाता
वो थे आसमान
और हम चाँद थे.

भाग्या प्रबल था
और हम भी प्रबल थे
वो कृष्णा थे हमारे
हम प्रखर थे उनके छाँव में.

Rifle Singh Dhurandhar

बहुत याद आते हो पिता


बहुत याद आते हो पिता
इस समंदर में.
ये युद्ध है सत्ता का
ये सुख है सत्ता का
सब अधूरा है इस आँचल में.

अम्बर तक पंख पसारे
उड़ता हूँ.
फिर भी एक सूनापन है
इस जीवन में.

मौत का वरन मुस्करा कर
कर लेंगें
अगर उस तरह आप मिलोगे।
प्रेम है तो बस पिता के आलिंगन में.

Rifle Singh Dhurandhar

Father and Ex


I missed my father
More than my ex
As that was the best father-son pair
That was selected by Nature.

My ex and I
Were just a choice made by us
And we were still looking
To find the best.

The love between my father and me
Was blind
Without any expectation
Full of appreciation and enjoyment.

The love with my ex
Was a force, which strength was
Proportional to my success rate
But my success rate was inversely proportional
To the availability of another successful man.

Rifle Singh Dhurandhar

पिता और मेरा प्रेम


पिता और मेरा प्रेम
जैसे गंगा की लहरों पे
उषा की किरणें
और प्रकृति मुस्करा उठी.

हर्षित पिता मेरी उदंडता पे
उन्मादित मैं उनकी ख्याति पे
पिता -पुत्र की इस जोड़ी पे
प्रकृति विस्मित हो उठी.

अभी जवानी चढ़ी ही थी
अभी मैं उनके रथ पे चढ़ा ही था
की प्रकृति ने
विछोह की घड़ी ला दी.

Rifle Singh Dhurandhar