पिता के प्यार का प्याला


हर पुत्र को पिता के प्यार का प्याला मिलना चाहिए,
ए खुदा,
जब तक पुत्र की प्यास न मिट जाए,
पिता – पुत्र का साथ बना रहना चाहिए।
सर्प – दंस से भी ज्यादा जहरीला है,
पिता से पुत्र का विछोह।
ए खुदा,
इस जहर का भी कोई तो काट होना चाहिए।

परमीत सिंह धुरंधर

दंश


ना मोक्ष चाहता हूँ, ना भोग चाहता हूँ,
ना सुख कोई, ना सवर्ग,
ना फिर मानव जीवन चाहता हूँ.
ना अब छीनो पुत्रों से उनके पिता,
ना मिले फिर किसी को,
ए विधाता,
मैं जो ये दंश झेलता हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

पिता


पिता तुम प्राणों से प्यारे हो,
हर जन्म में तुमसे ही साँसे मिलें।
तन तो तुम से विछुड़ गया,
मगर मन को तुम्हारा धाम मिलें।
पखार तो नहीं सका तुम्हारे चरणों को,
अब आसुंओं की धारा है.
तुमसे विछुड़ कर अब इन आँखों को भी,
बस पीड़ा – ही – पीड़ा है.

परमीत सिंह धुरंधर

Oh my daughter don’t be afraid


Oh my daughter,
Oh my daughter,
Don’t be afraid.
I am always with you,
Whatever will be the instance?
I was never the perfect man,
Neither I am.
But I want you
To grow in my hand,
But I want you
To walk with confidence,
I want you to keep the smiling face.
Every morning,
I want you to blaze like a Sun,
Every evening,
I want you to sing like a bird,
I want you to flow like a river,
Whether it is mountain or boiling season.
If you want to love someone,
Don’t care for the religion,
But never break anyone’s heart,
Never try to play smart,
Never use family as an excuse,
Because I want you to be different than,
These independent Indian girls.
Oh my daughter,
Oh my daughter,
Don’t be afraid.
Don’t need to be perfect,
Just be confident,
I am always with you,
Whatever will be the instance?
I want you
To walk with confidence,
And keep the smiling face.

Parmit Singh Dhurandhar

अंतर


औरत कितना भी शोर मचा ले,
कोई नहीं सुनता.
लेकिन, जब माँ को गुस्सा आता है तो,
कैसा भी बाप हो वो शांत हो जाता है.

परमीत सिंह धुरंधर

पिता


जमाने ने हमें सराहा नहीं,
और हमने कभी हार मानी नहीं।
उस तरफ हैं महफ़िलें,
और उनकी दीवालियाँ,
और हमने अभी तक जुगनुओं से,
अपनी ये दोस्ती तोड़ी नहीं।
सुख, सत्ता और खूबसूरत जिस्म की चाह में,
कुछ दोस्त उधर जाके बैठ गए।
सम्मान, दौलत और आगोश की लालसा में,
हुस्न वाले भी वहीं के होके बस गए।
झुलस रहा है मेरा तन धुप में,
और कंठ तरस गया है, दो बून्द पानी को।
वीरान और सुनसान, इन शाखाओं को,
फिर भी, जाने क्यों और किस उम्मीद में,
अभी तक हमने छोड़ा नहीं।
क्या दौलत सजों के रखें हम,
और किस लिए।
पिता के जाने के बाद,
किसी और गोद में,
जब अब तक मैं बैठा नहीं।
जमाने ने हमें सराहा नहीं,
और हमने कभी हार मानी नहीं।

परमीत सिंह धुरंधर

पिता-पुत्र की जोड़ी


वो पिता-पुत्र की जोड़ी,
बड़ी अलबेली दोस्तों।
एक अर्जुन,
एक अभिमन्युं दोस्तों।
एक ने रौंदा था,
भीष्म को रण में.
एक ने कुरुक्षेत्र में,
कर्ण-द्रोण को दोस्तों।

परमीत सिंह धुरंधर

बहुत तेरी यादें आती हैं पिता


बहुत तेरी यादें आती हैं पिता,
राहें जितनी काली, उतनी ज्यादा।
मन तो करता हैं, सब तोड़ के रख दूँ,
पर फिर, अकेला पर जाता हूँ पिता।
ठोकरों में गिरता ही हूँ रहा,
ठोकरों में गिर ही मैं रहा.
जख्मों पे जब भी मलहम लगता हूँ मैं,
आँखों में तुम ही छलक आते हो पिता।

परमीत सिंह धुरंधर

Two mistakes of my life


  1. When there was no Skype and STD/ISD booth was popular, I used to call my father everyday. It was during my graduation, 19998-2002. On such evening, I paid 500 by borrowing some money from my friend who was with me at that time. My friend told to everyone, and people started advising me to save money. They kept asking me why I was wasting money. Today, there is Skype, Hangout and money, however, my father, my biggest strength, is no more.
  2. Whenever my girlfriend used to ask for the movies, I took her for dinner or lunch. Finally, after the breakup, she told the reason that I was always trying to save money by avoiding movies. Now, I am making the dinner and go to watch movies as she, my greatest weakness, is not with me.

Parmit Kumar Singh

पिता


पिता ने दी है ये जिंदगी,
पिता पे ही लूटा दूंगा ये जिंदगी।
बिन पिता कुछ भी नहीं,
हैं ये जिंदगी।
तुम्हारे लिए छोड़ दिया है,
धर्म – ज्ञान की गाथा।
मैं तो लहराता रहूँगा,
अपने पिता का पताका।
पिता ने सींचा है मेरे प्राणों को,
पिता पे ही लूटा दूंगा अपने प्राणों को.
बिन पिता कुछ भी नहीं,
प्राणों की ये वेदी।

परमीत सिंह धुरंधर