बहुत दूर तक फैलने से अच्छा है,
तेरी गोद में सिमट के रह जाऊं,
ए माँ , तेरा आँचल में हर दर्द सह जाऊं,परमित.
Category: Mother
माँ
सब छोड़ गये मुझको,
जिस मोड़ पे आके हाँ,
बस एक माँ ने लगा के रखा है,
मुझको सीने से अपने हाँ.
सब कुछ लुटा के अपना,
जब रह गया खाली हाँथ,
बस एक माँ ने लगा के रखा है,
मुझको सीने से अपने हाँ.
कितनो को तोडा है,
कितनो को मोड़ा है,
सब भूल गये हमको,
जिस मोड़ पे आके हाँ,
बस एक माँ ने लगा के रखा है,
परमित सीने से अपने हाँ.
माँ और जावेद की मुंबई
वो महफ़िल में बसी हैं, अपने हुस्न को लेकर,
और पिला रहीं हैं सभी को, ओठों से छलका-छलका कर.
मैं चलता हूँ राहों में, हर कांटे को उठा कर,
जाने कब गुजरेंगी माएँ, नंगे पावँ चलकर.
है जावेद को घमंड जिस मुंबई के योवन पर,
रोज दान करते हैं हम उसे, परमित गंगा में नहा कर….Crassa