माँ के हाथों में दौलत बहुत है


जी रहा हूँ इस शहर में बस तेरा जिस्म देख के,
जिसपे रेशम का दुप्पटा फिसलता बहुत है.
लूटा दी अपनी सारी खुशियाँ,
परदेस में जिस दौलत को कमाने में.
उसे कमाने के बाद हम ये समझे,
की माँ के हाथों में दौलत बहुत है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

माँ का इरादा है


माँ का इरादा है,
की मुझको सवारें।
माँ का इरादा है,
की मुझको खिलाये।
माँ की आँखों की,
बस ज्योति मैं ही हूँ.
माँ ने अपनी आँखों का टीका,
बस मुझको ही लगाया है.
फिर कैसे तेरे योवन पे,
अपनी माँ को भुला दूँ.
माँ ने,
मेरे लिए चुल्ल्हा जलाया है,
माँ ने मेरे लिए,
रात के तीन बजे पुआ पकाया है.
अपनी हाथों को जलाकर,
मुस्कराकर, माँ ने मुझे,
भर पेट खिलाया है।
फिर कैसे तेरे अंगों पे,
माँ के छाले भुला दूँ.
ए हुस्न,
मेरी हसरत नहीं,
तुझको पाने की.
वो नासमझ थे,
जिन्होंने तेरी मोहब्बत में,
आसूं  बहाएं।
मैं उन सितारों में नहीं,
जो अंधेरों में छोड़कर माँ को,
बस तेरा आँचल सजाए।

 

परमीत सिंह धुरंधर

माँ


भगवान गणेश जी, भगवान श्री कृष्णा जी और भगवान हनुमान जी, सभी महान बने क्यों की उनका बचपन बस माँ और उनके हाथों से बने खाने को खाने में गुजरा। माँ के हाथ और उसके हाथ से बने खाने की महिमा इसी से समझी जा सकती है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

नींद


कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो शब्दों में बखान नहीं होते,
थाली सोने की हो, या केले के पत्ते की,
माँ के हाथों के बिना, उसमे स्वाद नहीं होती।
हम कितना भी कमा लें पैसों – पे – पैसा,
और एक – से – एक बिस्तर लगालें,
मगर वो सुकून नहीं मिलती।
जो नींद आती थी पुवाल पे गावं में अपने,
वो अब इन हसीनाओं के गोद में नहीं मिलती।

परमीत सिंह धुरंधर

आनंद


जब दिल टूट जाए, तो माता – पिता की सेवा करनी चाहिए।
धन तो नहीं मिलेगा, पर आनंद जरूर मिलेगा।

परमीत सिंह धुरंधर

लाखों में है एक मेरी माँ


mom

पहाड़ों पे चढ़ के देखा,
सितारों में बढ़ के देखा,
दिखती है बस माँ, हर मंदिर में,
जब भी सजदा कर के देखा।
भूखे पेट चल के देखा,
बैलों संग खेत में बह के देखा,
चूल्हे पे बैठी दिखी माँ,
जब – जब सुनी थाली देखा।
जख्मों को दुखते देखा,
हर रिश्ते को टूटते देखा,
रात भर सिराहने बैठी मिली माँ,
जब भी तन, टॉप में तपते देखा।
कैसे तोड़ दूँ ये रिस्ता,
जवानी की मस्ती में,
जिसके आँचल में पल कर,
मैंने हर सपना देखा।
सारी दुनिया घूम के देखा,
लाखों में है एक मेरी माँ.

परमीत सिंह धुरंधर

There is nothing which has more value than mom…..

माँ


धीरे – धीरे कहता हूँ मैं अपने आँखों के समंदर से,
अगर बहना ही है तो मेरी माँ के चरणों को धो दे.

परमीत सिंह धुरंधर

अंतर


औरत कितना भी शोर मचा ले,
कोई नहीं सुनता.
लेकिन, जब माँ को गुस्सा आता है तो,
कैसा भी बाप हो वो शांत हो जाता है.

परमीत सिंह धुरंधर

मेरा संघर्ष भी जारी है


प्रयास है जमाने का,
हमको मिटाने की.
मेरा संघर्ष भी जारी है,
हर गम में मुस्कराने की.
अकेला ही खड़ा हूँ,
एक दिन तो गिरना है.
पर अपनी भी चेष्टा हैं,
सबको झुठलाने की.
बादलों ने मुख मोड़ा है,
हवाओं ने रुख बदला है.
सब विरुद्ध में हैं खड़े,
पर माँ संग में है लेके,
दुवाओं की झोली।
प्रयास हैं लहरों का,
हमको उखारने की.
मेरा संघर्ष भी जारी है,
अपने हर निशाँ को बचाने की.
प्रयास है जमाने का,
हमको मिटाने की.
मेरा संघर्ष भी जारी है,
हर गम में मुस्कराने की.

परमीत सिंह धुरंधर

इश्क़


इश्क़ रातों को रोता हैं,
हुस्न के पास तो जमाना है मुस्कराने को.
सोचो, उस माँ पे क्या गुजरती होगी,
जिसका बेटा कमाता है, मयखाने में लुटाने को.

परमीत सिंह धुरंधर