अब मार द गुलेलिया ए हमार राजा,
कब तक खेल ब ई खेल अंखिया के.
फंस जाइ चिड़ियावा दूसर के जाल में,
जे देख अ त रही ब बस बाग़ के.
परमीत सिंह धुरंधर
अब मार द गुलेलिया ए हमार राजा,
कब तक खेल ब ई खेल अंखिया के.
फंस जाइ चिड़ियावा दूसर के जाल में,
जे देख अ त रही ब बस बाग़ के.
परमीत सिंह धुरंधर
मुखिया और मुखिया के बेटा, दुनु बारानसन हमारा फेर में,
अइसन जावानी आयिल बा ऐ माई हमारा देह पे.
एगो देता साड़ी त अ एगो देता हमके नया चोली।
बुधव से जवनका, सब केहू मांग आ ता हमारा के ही सेज पे.
अइसन जावानी आयिल बा ऐ माई हमारा देह पे.
परमीत सिंह धुरंधर
तुम्हे अपनी नजरों से इसारे कर दूंगी,
ना माने अगर बाबुल तो भी तुमसे बच्चे कर लुंगी।
दुनिया चाहे जो भी नाम दे दे मुझे,
पति को दे के जहर, तुम्हारी ता – उम्र गुलामी कर लुंगी।
एक सनक सी सवार है मस्तक पे मेरे,
तुझे पाने के लिए, हर गुनाह कर दूंगी।
रहती हूँ भोली – भाली सी घर – शहर में,
मगर तुझे अपना बनाने को, कमीनी बन लुंगी।
कुछ लोग सनकी होते हैं. उनके मस्तक पे एक सनक सवार होती है. तूफ़ान भी आ जाए, और अगर वो निकल चुके हैं घर से तो , वापस नहीं लौटेंगे। वो मिट जाएंगे, दुनिया हँसेगी, लेकिन उनको अपनी सनक, अपनी मौत से ज्यादा प्यारी है. ऐसे लोगो की हार नहीं होती, भले दुनिया उन्हें हारा हुआ समझे। ये लोग भले ज्यादा दिन न रहे, राज न करे, पर जब तक होतें हैं, एक बंटवारा तो हुआ रहता है समाज का उनके नाम पे, उनके काम पे.
परमीत सिंह धुरंधर
गुनाहों के चादर को कब तक समेटोगे,
इश्क़ कर लो, इससे बड़ा कोई गुनाह नहीं होता।
परमीत सिंह धुरंधर
Two beautiful eyes were besides me, thats how, sometime, you end your tiring day. And the result is you get up at 5.49 AM even if you slept 1.30 AM.
Parmit Singh Dhurandhar
हम दोनों के परिवार वाले नहीं मान रहे थे. इसलिए आज नदी किनारे हम दोनों भविष्य के भावी कदम उठाने के लिए मिले थे. मेरे परिवार के सख्त विरोध की बात सुनकर उसने अपना क्रोध इस तरह ब्यक्त किया की साड़ी गलतिया मेरी ही परिवार वालो की निकलने लगी.
सुरोधी: ” तो तुम परिवार वालों के चलते मुझसे शादी नहीं करोगे। इतने दिन तक फिर ये सब क्या था? मेरे शरीर से खलने के बाद परिवार वालों का ख़याल आया. परिवार वालों से पूछ लेते पहले फिर मेरे तन पे हाथ रखते। तुम वासना से ग्रसित हो, अगर प्यार रहता तो अब परिवार की बात नहीं करते।”
मैं:”मगर क्या तुम अपने परिवार के खिलाफ जाओगी?”
सुरोधी: ” मैं तुम्हारे लिए सब कुछ छोड़ सकती हूँ. मेरा प्यार सच्चा है. तुम्हारी तरह शरीर का भूख नहीं। सब मर्द कुत्ते होते हैं.”
अंततः मैंने तय किया की परिवार के खिलाफ जाके सुरोधी को अपना बनूँगा। सुरोधी ने मुझे गले लगा लिया।
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6 महीने से मैं अपने परिवार से अलग रह रहा हूँ, कोई बात चित नहीं। इस बीच सुरोधी ने हर बार मेरी शादी की बात को टाल दिया। पिछले महीने मैंने उससे बिना पूछे ही कोर्ट में शादी का आवेदन कर दिया। आज शादी की तारीख मिलने पे, मैं सीधे सुरोधी के घर उससे बताने बताने पहुचा। सोचा पहले तो वो गुस्सा होगी पर बाद में खुश होगी ये जानकार की मैं सिर्फ उसके शरीर के पीछे नहीं हूँ.
दरवाजे को सुरोधी की छोटी बहन ने खोल और वो मुझे देख के सकपका गयी. अंदर काफी लोग थे और अचानक मुझे एक जोरदार धक्का लगा. सामने सुरोधी की सगाई का सामारोह चल रहा था, और उसकी हाथों में सगाई की अंघुठि जगमगा रही थी. उसके चेहरे पे सर्द हवाएं छाने लगी, मुझे देख कर. मैंने उसको बधाई दिया और वहाँ से निकल गया. भाड़ी क़दमों से चलता हुआ मैं बस यही सोच रहा था क्यों किया उसने ऐसा मेरे साथ. शायद लोगों ने सही कहाँ है लडकिया ऊँचे पेड़ पे चढ़ा के गिराती हैं. उन्हें बिना घर तोड़े किसी का, मंडप में बैठना पसंद नहीं है.
For the Valentine’s Day
परमीत सिंह धुरंधर
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?
मन भर के चिपरी पथा गइल बा,
रउरा आलाउवा में कहिया जली.
अंग – अंग हमार गेहूं के बाली भइल बा,
कहिया थ्रेसर से दवनी होइ?
गन्ना, सरसों से भड़ गइल खलिहान,
अब महुआ के रस, राजा कहिया चली?
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?
अंखिया भी देखअ सुरमई बहिल बा,
केशिया में सावन गदराइल लागल बा.
अंखिया के हमारा तीर ए राजा,
तरकश पे रउरा कहिया चढ़ी?
गजरा के हमार फूल ए राजा,
खटिया पे रउरा कहिया टूटी?
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?
परमीत सिंह धुरंधर
Kisses are meant to travel million light years within a second.
Parmit Singh Dhurandhar
शैने: – शैने: तवं चलसी,
शैने:-शैने: मम हृदयँ कूर्दनं करोति।
तवं चलसी शैने: – शैने:,
मम हृदयँ शैने:-शैने:,
कूर्दनं करोति।
तवं शैने: – शैने: चलसी,
मम शैने:-शैने: हृदयँ कूर्दनं करोति।
चलसी शैने: – शैने: तवं,
कूर्दनं करोति मम शैने:-शैने: हृदयँ ।
चलसी तवं शैने: – शैने: ,
हृदयँ कूर्दनं करोति मम शैने:-शैने: ।
शैने: – शैने: चलसी तवं,
करोति कूर्दनं मम हृदयँ शैने:-शैने: ।
परमीत सिंह धुरंधर
Lets do it
Once again
Does not matter
How much pain
I feel, I feel.
With your arms on my waist
And a deep kiss
I can do anything
For you O baby.
Lets do it
Once again
Does not matter
How much pain
I feel, I feel.
Neither I care of your past
Nor about your plan
I just want
This night lasts forever.
Lets do it
Once again
Does not matter
How much pain
I feel, I feel.
So keep me warm
And be my man
Lets do it
Once again
Does not matter
How much pain
I feel, I feel.
Parmit Singh Dhurandhar