ना प्रेम करों,
ना उपहास करों।
नारी तो देवी है,
पर,
ना चरण – स्पर्श करों।
ये तो माँ का सम्मान है,
ना माँ का नारी से तुलना करों।
माँ तो शक्ति हैं, माँ तो सत्य हैं,
माँ साक्षात् ब्रह्म है,
बस माँ का ही बंदन करों।
परमीत सिंह धुरंधर
ना प्रेम करों,
ना उपहास करों।
नारी तो देवी है,
पर,
ना चरण – स्पर्श करों।
ये तो माँ का सम्मान है,
ना माँ का नारी से तुलना करों।
माँ तो शक्ति हैं, माँ तो सत्य हैं,
माँ साक्षात् ब्रह्म है,
बस माँ का ही बंदन करों।
परमीत सिंह धुरंधर
हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों बसा लें अपनी,
एक छोटी सी दुनिया।
जिसमे एक चूल्हा हो,
जिसको तुम जलाती हो.
जिसमे एक मुन्ना हो,
जिसको हम खेलाते हों.
हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों सजा ले अपनी,
ये छोटी सी बगिया।
जब तुमको चोट लगे,
मैं हल्दी छाप दूँ.
जब मुझको भूख लगे,
तुम मछली बना लेना।
हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों बना ले अपनी
छोटी सी कुटिया।
मैं कंगन खरीद लाऊं,
तुम दिन – भर ख़नक़ाना।
मैं साड़ी पहनाऊं,
तुम मुझको नहलाना।
हम हैं Parmit Crassa,
तुम हो Jwala Gutta.
आवों एक कर लें,
अब अपनी खटिया।
For Jwala Gutta
परमीत सिंह धुरंधर
आँखों के सपने हजार बार टूटे,
फिर भी दिल धड़क ही जाता है प्यार में.
मेरे दर्द पे वो हजार बार मुस्कराती हैं,
पर दिल भूल ही जाता है उनके दीदार पे.
इश्क़ भी है अपना मरुस्थल जैसा,
जहाँ एक बून्द भी नहीं बारिश की.
पर देख कर हुस्न को,
दिल मयूर सा मचल ही जाता है प्यार में.
परमीत सिंह धुरंधर
वो अपनी मोहब्बत का,
हमपे यूँ सितम कर गए.
हम अब तन्हा – तन्हा रहते हैं,
वो जवान कर गए.
नासमझी थी, या शर्मो – हया,
सब दूरी मिटा के वो सबसे दूर कर गए.
हम अब तन्हा – तन्हा रहते हैं,
वो जवान कर गए.
परमीत सिंह धुरंधर
गली – गली में देखा तुझको,
गली – गली में शोर है.
सैयां मेरी आँखों को,
तू लग रहा एक चोर है.
कल से गायब मेरी चुनर हैं,
और चोली भी तंग है.
सैयां मेरी आँखों को,
तू लग रहा एक चोर है.
तू तो हो गयी है वावरी,
उस पड़ोसन की सुन – सुन के.
उसके त्रिया-चरित्र का,
ये सब एक नया झोल हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
The desire is high,
The fire is on.
I want to solve the equation,
Right now.
Let me break all rules right now.
आँखे मिला के तूने सोनिये,
कर दिया हमको दीवाना है.
अब तो तमन्ना हैं पीने की होंठों को,
बिना इसके होगा मेरा गुजारा नहीं।
The desire is high,
The fire is on.
I want to solve the equation,
Right now.
Let me break all rules right now.
Parmit Singh Dhurandhar
आँखों के सपने आँखों में ही रह गए,
गैर उठा के उनकी डोली ले गए.
आँखों के आंसू होंठों से चख के,
हम अपने ओसारे से देखते ही रह गए.
लाल चुनार ओढा के, मेहँदी लगा के,
गैर उन्हें मंगलसूत्र पहना गए.
परमीत सिंह धुरंधर
मैं गलियों का हूँ शहजादा,
तू महलों की रानी।
थोड़ा इश्क़ करेंगे परदे में,
थोड़ा बे-पर्दा मेरी रानी।
शर्म – हया हैं तेरी आँखों में,
और मेरी बेशर्म जवानी।
थोड़ा इश्क़ करेंगे बंद कमरे में,
थोड़ा खुले खेतों में मेरी रानी।
मैं नहीं रुक सकता रातों का अँधेरा छाने तक,
मैं नहीं संभल सकता तेरा दिया बुझाने तक,
थोड़ा इश्क़ करेंगे अंधेरों में,
थोड़ा नहरों पे मेरी रानी।
परमीत सिंह धुरंधर
तू दरिया – दरिया आके मुझसे तो मिल,
मैं सागर – सागर तेरी मोहब्बत में चख लू.
तू एक फूल तो मेरे आँगन में रख,
मैं तेरे लिए सारा मरुस्थल सींच दूँ.
परमीत सिंह धुरंधर
खूबसूरत जिस्म पे कभी उनके,
मेरा भी हाथ था.
अब कहती हैं,
क्या ये मेरा कम सौभाग्य था.
परमीत सिंह धुरंधर